हरियाणा के कैथल में किसानों को गंभीर परेशानी झेलनी पड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार ने पराली जलाने पर सख्त रुख अपना लिया है। नए नियम के मुताबिक पराली जलाने वाले किसानों की फसल दो सीजन तक एमएसपी पर नहीं खरीदी जाएगी। उन्हें जुर्माना देना पड़ेगा और कानूनी कार्रवाई भी झेलनी पड़ेगी।
कैथल के किसानों का कहना है कि उनके पास पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली एनसीआर को भारी वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। ये हालत खास कर अक्टूबर और नवंबर में फसल कटने के बाद सामने आती है।
धान उगाने वाले किसान रबी की बुआई के लिए पराली में आग लगा देते हैं, क्योंकि पिछली फसल की कटाई और अगले फसल की बुआई के बीच समय कम होता है।हरियाणा के मुख्य सचिव टी. वी. एस. एन. प्रसाद ने रविवार को निर्देश दिया कि पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।
पुलिस के मुताबिक सिर्फ कैथल में ही पराली जलाने वालों के खिलाफ 18 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पराली जलाने वालों के खिलाफ प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम और कानून के दूसरे प्रावधानों के तहत मामले दर्ज हुए हैं।
हाल में पानीपत और यमुनानगर समेत कुछ और जिलों में भी पराली जलाने पर एफआईआर दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को पराली जलाने के दोषियों पर मुकदमा न चलाने पर पंजाब और हरियाणा सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को अपनी बात रखने के लिए 23 अक्टूबर को पेश होने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पराली जलाने पर प्रशासन सख्त
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