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बेहद खतरनाक है पैंक्रियाटिक कैंसर, कुछ ऐसे होते हैं इसके शुरुआती लक्षण

पैंक्रियाटिक कैंसर आपके पेंक्रियाज पर काफी ज्यादा बुरा असर डालता है. जो आपके पेट में एक ग्लैंड होता है जो पाचन में सहायता करती है. पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षणों में मतली, सूजन, थकान, पीलिया और भूख की कमी शामिल है. इसके इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी ट्रीटमेंट शामिल हैं. पैंक्रियाटिक कैंसर से बचने के चांसेस कम होते हैं क्योंकि फर्स्ट स्टेज में इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता है. 

यह तब होता है जब पेट में मौजूद अग्नाशय, जो पाचन और हार्मोन उत्पादन में भूमिका निभाता है अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है तो कैंसर होता है. यही ट्यूमर बन जाता है. वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड (WCRF) अग्नाशय कैंसर 12वां सबसे आम कैंसर है. पैंक्रियाटिक कैंसर दो तरह के होते हैं जो एक्सोक्राइन ट्यूमर हैं वो न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर की तुलना में अधिक आम हैं. पैंक्रियाज के कैंसर के लक्षण अक्सर न के बराबर होते हैं और शुरुआती चरणों में तो इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है.

जैसे-जैसे कैंसर अपने स्टेज बदलता है बीमारी बढ़ती है, व्यक्तियों को पेट में दर्द जैसे चेतावनी के संकेत दिखाई देने लगते हैं जो पीठ तक फैल सकते हैं त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), सामान्य थकान और भूख में कमी मतली और उल्टी, अनजाने में वजन कम होना, त्वचा में खुजली, गहरे रंग का पेशाब, नए मधुमेह का विकास या पहले से मौजूद मधुमेह का बिगड़ना. पैंक्रियाटिक कैंसर धूम्रपान, मोटापा, उम्र, अग्नाशय की सूजन, जेनेटिक और फैमिली हिस्ट्री के कारण होता है. लक्षण दिखने पर समय रहते इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है. अगर इसका वक्त रहते इलाज कर दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है. 

पैंक्रियाज कैंसर के इलाज का तरीका

पैंक्रियाज कैंसर की स्थिति देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि इलाज किस तरीके से करना है. पैंक्रियाज कैंसर को सर्जरी के जरिए भी ठीक करने की कोशिश की जाती है. उसे रिसेक्शन के रूप में जाना जाता है, जिसे कैंसर के स्थान के आधार पर पैंक्रियाटिकोडुओडेनेक्टॉमी या डिस्टल पैंक्रियाटेक्टॉमी के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है.

विकिरण चिकित्सा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए अल्ट्रा हाई रेज का उपयोग करती है. कीमोथेरेपी में इन कोशिकाओं को खत्म करने के लिए दवाओं का उपयोग करना शामिल है. लक्षित चिकित्सा उन विशिष्ट प्रोटीन और जीन पर ध्यान केंद्रित करती है जो कैंसर के विकास में योगदान करते हैं.

ब्लड में शुगर लेवल कम होता है

धूम्रपान छोड़ना, संतुलित आहार का पालन करके इष्टतम वजन बनाए रखना, जंक, तैलीय, डिब्बाबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचना और प्रतिदिन नियमित शारीरिक गतिविधि करना सभी के लिए उचित है.रक्त शर्करा की निगरानी करके मधुमेह को रोकने और प्रबंधित करने के लिए कदम उठाना और शराब का सेवन सीमित करना कुछ महत्वपूर्ण निवारक उपाय हैं जो किसी को स्वस्थ रहने में मदद करेंगे. अग्नाशय के कैंसर का समय पर प्रबंधन केवल जीवन बचाने के बारे में नहीं है, यह उस जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के बारे में है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.