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अमेरिका में चुनाव को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, वोटिंग के लिए अब नागरिकता का सबूत जरूरी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अहम कदम उठाते हुए देश की चुनाव प्रणाली को नया स्वरूप देने के मकसद से एक व्यापक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कार्यकारी आदेश की एक खास बात संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता के प्रमाण की प्रस्तावित अनिवार्य जरूरत है। ये एक ऐसा कदम माना जा रहा है जो मतदान के अधिकार और चुनाव की अखंडता को दोबारा परिभाषित कर सकता है।

गैर-नागरिक मताधिकार पर बहस अमेरिका की स्थापना के बाद से सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है। ऐसे में ये सबसे नया उपाय चुनाव सुधारों पर चल रही बातचीत में एक नया अध्याय जोड़ता है। कार्यकारी आदेश में डाक से भेजे जाने वाले मतपत्रों के लिए भी सख्त समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके मुताबिक उन्हें चुनाव के दिन तक मिल जाना चाहिए।

इसमें ये भी अनिवार्य किया गया है कि सभी वोट चुनाव के दिन तक डाले और प्राप्त किए जाने चाहिए। संघीय वित्त पोषण को इस नियम के राज्य अनुपालन से जोड़ा गया है। नेशनल कांफ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर के मुताबिक, 18 राज्य और प्यूर्टो रिको वर्तमान में चुनाव के दिन के बाद भेजे गए मतपत्र स्वीकार करते हैं, बशर्ते कि उन्हें आखिरी तारीख पर या उससे पहले भेजा गया हो।

कार्यकारी आदेश में उन वोटिंग सिस्टमों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो वोटों की गिनती के लिए क्यूआर कोड या बारकोड पर निर्भर हैं। साथ ही ये विदेशी नागरिकों को कुछ राजनैतिक डोनेशन देने से भी रोकता है।

इसके अलावा, जो राज्य संघीय चुनाव अपराध जांचों के साथ सहयोग करने से इनकार करेंगे उनका संघीय अनुदान रोका जा सकता है। अपने व्यापक उपायों के साथ, इस कार्यकारी आदेश में वोटिंग की तस्वीर को नया रूप देने की क्षमता है। हालांकि जानकारों का मानना है कि संवैधानिक आधार पर इसे कानूनी चुनौतियां मिल सकती हैं।