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विश्व पर्यटन दिवस: मोदी-योगी सरकार के प्रयासों से बदली काशी की तस्वीर, 13 साल में 52.71 करोड़ पर्यटक पहुंचे

गंगा के अर्धचंद्राकार घाट, मंदिरों की घंटियां, संकरी गलियां और सदियों पुरानी परंपराएं काशी को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग पहचान देती हैं। आस्था और संस्कृति के केंद्र काशी में बीते वर्षों में पर्यटन सुविधाओं और कनेक्टिविटी के विस्तार से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक वाराणसी में 52 करोड़ 71 लाख 41 हजार 814 भारतीय और विदेशी पर्यटक पहुंचे। इनमें 52 करोड़ 40 लाख 46 हजार 803 भारतीय और 30 लाख 95 हजार 11 विदेशी पर्यटक शामिल हैं।

2026 के सात महीनों में 4.65 करोड़ से ज्यादा पर्यटक

आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में जुलाई तक 4 करोड़ 65 लाख 60 हजार 419 पर्यटक वाराणसी पहुंचे। इनमें 4 करोड़ 64 लाख 27 हजार 878 भारतीय और 1 लाख 32 हजार 541 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। 2014 में वाराणसी आने वाले पर्यटकों की संख्या 54 लाख 89 हजार 997 थी। इसके मुकाबले 2026 के शुरुआती सात महीनों में ही पर्यटकों की संख्या काफी अधिक रही।

पर्यटन बढ़ने से स्थानीय कारोबार को मिला फायदा

पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का असर वाराणसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, नाव संचालन, फूल-माला, पूजा सामग्री, टैक्सी-ऑटो, टूर एंड ट्रैवल सेवाओं के साथ स्थानीय बाजार और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग बढ़ी है। इससे पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, नाविकों, गाइडों, कारीगरों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर बढ़े हैं। पर्यटन अब धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।

कनेक्टिविटी और सुविधाओं से बढ़ा आकर्षण

वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद काशी में विकास और पर्यटन से जुड़े कार्यों को गति मिली। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ सार्वजनिक सुविधाओं, स्वच्छता, घाटों के विकास और प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण पर काम हुआ।

काशी विश्वनाथ धाम के विकास से मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ीं। घाटों के विकास और साफ-सफाई, सारनाथ में सुविधाओं के विस्तार और गंगा में रिवर क्रूज जैसी गतिविधियों ने काशी के पर्यटन अनुभव को और व्यापक किया। आज काशी में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। सदियों पुरानी परंपराओं को नए स्वरूप में पेश किए जाने से पर्यटकों को शहर की संस्कृति और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।

विश्व पर्यटन दिवस पर काशी की बदलती तस्वीर

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर काशी में पर्यटन के बढ़ते आंकड़े शहर की बदलती तस्वीर को सामने रखते हैं। विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और पर्यटन ढांचे के विस्तार से वाराणसी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख गंतव्य के रूप में सामने आया है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “हमारा प्रयास है कि काशी की सदियों पुरानी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को आधुनिक पर्यटन से जोड़ा जाए, ताकि दुनिया भर के पर्यटक यहां आकर केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, विरासत और जीवन शैली का भी अनुभव लेकर लौटें।”

वाराणसी में पर्यटकों का आंकड़ा

वर्ष

भारतीय पर्यटक

विदेशी पर्यटक

कुल पर्यटक

2014

52,02,236

2,87,761

54,89,997

2015

54,13,927

3,02,370

57,16,297

2016

56,00,146

3,12,519

59,12,665

2017

59,47,355

34,860

62,82,215

2018

60,95,890

3,49,270

64,45,160

2019

64,47,775

3,50,000

67,97,775

2020

8,76,303

1,06,189

9,82,492

2021

30,75,913

2,566

30,78,479

2022

7,11,47,310

83,741

7,12,31,051

2023

8,52,71,729

2,01,904

8,54,73,633

2024

10,97,87,811

3,09,932

11,00,97,743

2025

17,27,52,530

3,21,358

17,30,73,888

2026 (जुलाई तक)

4,64,27,878

1,32,541

4,65,60,419