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शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंप देगा भारत? क्या कहती है दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक "आधिकारिक पत्र " भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। हसीना को बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण ने मौत की सजा सुनाई है। 78 साल की शेख हसीना वर्तमान में भारत में शरण लिए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 17 नवंबर को हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को "मानवता के खिलाफ अपराध" के आरोप में मृत्युदंड सुनाया था।

भारत ने बांग्लादेश में शांति और स्थिरता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही कहा है कि उन्होंने भी "फैसले पर ध्यान दिया है" पिछले साल पांच अगस्त को "जुलाई विद्रोह" के नाम से जाने जाने वाले छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान अपनी अवामी लीग सरकार गिराए जाने के बाद हसीना देश छोड़कर भाग गई थीं।

आपको बता दें कि भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है, जिसके तहत दोनों देशों को ऐसे लोगों को सौंपना आवश्यक है जिन पर कम से कम एक साल की जेल की सजा वाले अपराधों का आरोप लगाया गया हो या वे दोषी पाए गए हों।

यह संधि प्रत्यर्पण की अनुमति तब भी देती है जब अपराध देश के बाहर किया गया हो, बशर्ते वह अनुरोध प्राप्त करने वाले देश के कानूनों के तहत भी दंडनीय हो। संघि में आतंकवाद से संबंधित और हिंसक अपराधों को स्पष्ट रूप से "राजनीतिक अपराध" के रूप में नहीं माना जाता है।

हालांकि संधि के तहत प्रत्यर्पण को अस्वीकार करने की भी कई वजह हो सकती हैं।जिसमें कि यदि आरोप "अन्यायपूर्ण, राजनीति से प्रेरित, या दुर्भावना से किया गया" प्रतीत होता हो। वहीं प्रत्यर्पण को उस कंडीशन में भी अस्वीकार किया जा सकता है जब मामला सैन्य अपराधों से जुड़ा हो या व्यक्ति पर पहले ही उसी अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा चुका हो।