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अयोध्या के जनौरा को क्यों कहा जाता है माता सीता का मायका?

सब वाकिफ हैं इस बात से कि, माता सीता का मायका जनकपुर है, लेकिन आप हैरान हो जाएंगे ये जानकर, माता सीता का एक मायका अयोध्या में भी है। अगर आप नहीं जानते हैं तो जानने के लिए पूरा लेख पढ़िए। दरअसल, अयोध्या (Ayodhya) के श्रीराम राम और जनकपुर की सीता का विवाह मार्गशीर्ष शुक्ल की पंचमी तिथि को हुआ था। लेकिन जनकपुर के साथ ही जनौरा गांव भी सीता जी का मायका कहलाता है। हालांकि इससे  आप चौंक सकते हैं कि अयोध्या में तो उनका ससुराल है। 

अयोध्या में जनौरा गांव को माता सीता के पिता राजा जनक ने बसाया था। उन्होंने राजा दशरथ से अयोध्या के पास भूखंड खरीदकर इस गांव को बसाया था। इसलिए अयोध्या से सटे जनौरा गांव को राजा जनक की मल्कियत कहा जाता है। जनौरा गांव में राजा जनक ने महल भी बनाया। साथ ही अपने आराध्य शिवजी का मंदिर भी। हां सीता कुंड है तो यज्ञ हवन के लिए ब्रह्मकुंड भी। भगवान राम के समकालीन महर्षि वाल्मिकी ने अपने रामायण में इस स्थान का वर्णन जनकचौरा के नाम से किया है। हालांकि कालांतर में अपभ्रंष की वजह यह जनकचौरा से जनौरा बन गया। 

अयोध्या का जनौरा गांव राम के वनवास का गवाह बना। रावण विजय के बाद जब राम अयोध्या आए तो उनके राजतिलक का गवाह बना। इन दोनों मौकों पर राजा जनक जनौरा में मौजूद रहे और लंबे समय तक यहां प्रवास किया था। इसी जनौरा में उन्होंने वनवास के समय माता सीता को उपदेश किया था। इसके बाद राजतिलक के वक्त भी राजा जनक ने सीता को एक पटरानी की मर्यादा सिखाई थी। अब एक बार फिर जनकपुर से बड़ी संख्या में लोग रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अयोध्या पहुंचे हैं। इनके ठहरने का इंतजाम भी इसी जनौरा में किया गया है।