उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। वह देश के ऐसे तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा है। उनके इस अप्रत्याशित फैसले से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है और इसके पीछे की संभावित वजहों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
उनसे पहले वी. वी. गिरि ने 1969 में राष्ट्रपति बनने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला था और फिर स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था। भैरों सिंह शेखावत ने भी 2007 में राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल से हार के बाद इस्तीफा दे दिया था। आर. वेंकटरमन, शंकर दयाल शर्मा और के. आर. नारायणन जैसे उपराष्ट्रपतियों ने भी इस्तीफा दिया था, लेकिन वे सभी राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने के बाद इस पद से हटे थे। वहीं कृष्णकांत एकमात्र ऐसे उपराष्ट्रपति रहे हैं जिनका कार्यकाल के दौरान निधन हुआ था।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद, उपराष्ट्रपति पद खाली हो गया है। ऐसे में निर्वाचन आयोग जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा कर सकता है। तब तक के लिए राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संविधान के अनुरूप निभाया जाएगा। सरकार या उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है कि इस्तीफे का कारण क्या रहा, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस घटनाक्रम के राजनीतिक और संवैधानिक मायने आने वाले दिनों में और स्पष्ट होंगे।