मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे मिशन कर्मयोगी में उत्तर प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। प्रदेश को इस उपलब्धि के लिए लखनऊ में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में सम्मानित किया गया। राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर रहा।
डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों और विभागों को पुरस्कार प्रदान किए। इस उपलब्धि से प्रशासनिक दक्षता, प्रशिक्षण और सरकारी कर्मचारियों के क्षमता विकास में उत्तर प्रदेश की अग्रणी भूमिका सामने आई है।
यूपी में 19.23 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता, 99 प्रतिशत से अधिक सक्रिय
मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर प्रदेश के करीब 19.23 लाख उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। इनमें 99 प्रतिशत से अधिक सक्रिय हैं।
उन्नति पहल के तहत प्रदेश में 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों का पंजीकरण किया गया है। जनवरी 2026 में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय क्षमता विकास कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। साधना सप्ताह में भी उत्तर प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा निर्भय नेत्री, निर्भय चेतना, कौशल सेतु और कौशल सारथी जैसी पहलें भी कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
गृह विभाग ने अकेले पूरे किए एक करोड़ से अधिक कोर्स
मिशन कर्मयोगी के तहत विभागीय प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने श्रेणी ‘क’ में पहला स्थान हासिल किया। विभाग ने अकेले एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। गृह विभाग की ओर से डीजी ट्रेनिंग राजीव अग्रवाल और डीआईजी देव रंजन वर्मा ने पुरस्कार प्राप्त किया।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को संबंधित श्रेणी में दूसरा पुरस्कार मिला। इस विभाग में भी एक करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सम्मान प्राप्त किया।
उच्च शिक्षा विभाग को श्रेणी ‘ख’ में पहला स्थान मिला, जबकि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग दूसरे स्थान पर रहा। श्रेणी ‘ग’ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को पहला और प्रशासनिक सुधार विभाग को दूसरा पुरस्कार दिया गया।
उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स से प्रशिक्षण संस्थानों की होगी रेटिंग
कार्यशाला में क्षमता विकास आयोग की दो प्रमुख पहलों—उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क—का शुभारंभ भी किया गया। उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स के जरिए देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता, गुणवत्ता और प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। अभी तक संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन दो साल में एक बार किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में लगातार समीक्षा और सुधार पर जोर रहेगा।
यह सूचकांक तीन संकेतकों और सात क्षेत्रों पर आधारित स्टार रेटिंग व्यवस्था उपलब्ध कराएगा। इसमें संस्थानों के संकाय, पाठ्यक्रम और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन होगा। संस्थानों की तुलना उनकी समान श्रेणी के संस्थानों से की जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से आंकड़ों का विश्लेषण कर सुधार के अवसर भी पहचाने जाएंगे। इसके साथ ही उन्नति रेडीनेस इंडेक्स के जरिए प्रशिक्षण संस्थान अपनी मौजूदा स्थिति का आकलन कर सकेंगे और आगे सुधार की योजना बना सकेंगे।
नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क से प्रशिक्षण को मिलेगी दिशा
क्षमता विकास आयोग ने नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क (एनसीडीएफ) भी शुरू किया है। कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क और कर्मयोगी कॉम्पिटेंसी मॉडल पर आधारित यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को अधिकारियों की जिम्मेदारियों और काम की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने में मदद करेगी।
इसमें सीखने के चार स्तर तय किए गए हैं—बुनियादी, निपुणता, उन्नत और विशेषज्ञता। इन स्तरों के आधार पर अधिकारियों को उनकी भूमिका और निर्णय लेने की जिम्मेदारी के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण को अधिक व्यवस्थित, उपयोगी और प्रभावी बनाना है।
प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
सरकारी कर्मचारियों की क्षमता विकास व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों के बीच ज्ञान, अनुभव, विशेषज्ञता और संसाधनों को साझा करने पर भी जोर दिया गया। इसी दिशा में रुपाम ने अन्य राज्य और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इन पहलों से प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन करने, पाठ्यक्रमों में सुधार लाने और अधिकारियों-कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में मदद मिलेगी।