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अमेरिका-ईरान वार्ता विफल, तेल बाजार में जोरदार उछाल, दुनिया पर मंडराया ऊर्जा संकट

पश्चिमी एशिया में शांति की उम्मीदों को आज उस समय बड़ा झटका लगा जब अमेरिका और ईरान के बीच वाशिंगटन समर्थित शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी। इस विफलता का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद रहने से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति ठप होने का डर सताने लगा है।

सोमवार, 11 मई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों ने लंबी छलांग लगाई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $3.18 (3.14%) की बढ़त के साथ $104.47 प्रति बैरल पर पहुंच गया। WTI क्रूड (भी $3.92 (4.11%) की भारी तेजी के साथ $99.34 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। बार-बार होते संघर्षों के बीच दोनों देश एक कमजोर युद्धविराम को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच खबर है कि ट्रम्प इस सप्ताह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे, जहां वे ईरान को मिल रहे चीनी समर्थन और हथियारों के निर्यात पर कड़ा ऐतराज जता सकते हैं।

फरवरी के अंत से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने जैसी स्थिति बनी हुई है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और ईंधन की सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, यह संघर्ष इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ईरान ने अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार के हिस्से को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव तो दिया है, लेकिन अपनी परमाणु सुविधाओं को खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है। तनाव केवल मेज तक सीमित नहीं है। रविवार को कतर के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत ने भी अपनी सीमा में घुस रहे दुश्मन ड्रोन को मार गिराने की सूचना दी है।