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पहलगाम हमले की बरसी से पहले कश्मीर में लौटे पर्यटक, सुरक्षा पर बढ़ा भरोसा

पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से कुछ दिन पहले कश्मीर घाटी में देशभर से पर्यटकों का आना शुरू हो गया है, जो क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। पर्यटकों ने घाटी के माहौल को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बताया। एक पर्यटक विशाल ने कहा, "मेरे पिता पहले यहां रहते थे और उन्हीं के कहने पर हम श्रीनगर आए। यहां खुद को काफी सुरक्षित महसूस कर रहा हूं, लोग भी बहुत अच्छे हैं।" वहीं एक अन्य पर्यटक ने कहा, "यहां का माहौल बहुत अच्छा है, शहर साफ-सुथरा और शांत है। अब कोई डर नहीं है, हमें भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस पर पूरा भरोसा है।"

पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी। हमले के बाद सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रशासन ने क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग सिस्टम शुरू किया है, जिससे पर्यटकों, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय व्यवसायों का रियल-टाइम सत्यापन किया जा रहा है। यह कदम निगरानी बढ़ाने, अवैध गतिविधियों को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मददगार साबित हो रहा है।

यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक जुनैद कुरैशी ने हमले को पर्यटकों पर लक्षित हिंसा बताया और इसके पीछे बाहरी समर्थन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों का उद्देश्य कश्मीर में शांति और विकास को बाधित करना है। कुरैशी ने यह भी बताया कि इस घटना का कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा है, जिससे रोजगार और निवेश प्रभावित हुआ। हालांकि, अब पर्यटकों की वापसी से हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि कश्मीरियों को एकजुट होकर ऐसे तत्वों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। यह बरसी शांति, एकता और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कदम उठाने की याद दिलाती है।