प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान श्री सोमनाथ महादेव की पावन धरती पर 27, 28 और 29 नवंबर 2026 को सातवीं संत संसद का भव्य आयोजन होने वाला है। नेटवर्क 10 न्यूज़ चैनल की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘संत संसद—राष्ट्र की बात’ होगा। इसमें देशभर के संत, महामंडलेश्वर, धर्माचार्य और सनातन संस्कृति से जुड़े प्रमुख विचारक शामिल होंगे।
सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर, गाजियाबाद के पीठाधीश्वर और श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने इस आयोजन पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने नेटवर्क 10 के एडिटर इन चीफ और संत संसद के अध्यक्ष संजय गिरि तथा उनकी पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
सोमनाथ की धरती से दिया जाएगा राष्ट्रीय एकता का संदेश
श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने कहा कि भगवान सोमनाथ का धाम भारत की आस्था, साहस, त्याग और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक है। इस पवित्र भूमि पर संत संसद का आयोजन सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से नई पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास, पूर्वजों के बलिदान और धार्मिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
नोएडा से लंदन तक पहुंची संत संसद की यात्रा
महाराजश्री ने कहा कि संत संसद की शुरुआत नोएडा से हुई थी। इसके बाद अयोध्या, मुंबई, जयपुर, दिल्ली और लंदन में इसका आयोजन हो चुका है। अब सातवीं संत संसद भगवान सोमनाथ की धरती पर आयोजित होगी। उन्होंने नेटवर्क 10 की सराहना करते हुए कहा कि चैनल ने संतों के विचारों और आध्यात्मिक संदेशों को देश-विदेश तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।
जातिवाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद पर जोर
श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने कहा कि भारत की ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता में है। जातिवाद, क्षेत्रवाद और आपसी भेदभाव समाज को कमजोर करते हैं। संत समाज का उद्देश्य लोगों को जोड़ना और सद्भाव का संदेश देना है।
उन्होंने कहा कि सातवीं संत संसद का मूल संदेश होगा—‘ना जातिवाद, ना क्षेत्रवाद, केवल और केवल राष्ट्रवाद।’ इस मंच से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया जाएगा।
सनातन बोर्ड, गौ-रक्षा और मंदिरों की सुरक्षा पर होगी चर्चा
तीन दिवसीय संत संसद में सनातन बोर्ड के गठन की मांग, गौ-रक्षा, प्राचीन मठ-मंदिरों की सुरक्षा, धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है।
इसके अलावा धर्मांतरण से जुड़ी चिंताओं, सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कारों से जोड़ने जैसे विषयों पर भी संत और विचारक अपने विचार रखेंगे।
महाराजश्री ने कहा कि गौ-सेवा, धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा और सनातन संस्कृति का संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। इन विषयों पर संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सद्भाव के साथ संवाद होना चाहिए।
युवाओं को संस्कार और विकसित भारत का संदेश
महाराजश्री ने कहा कि आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के साथ युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक परंपराओं की जानकारी भी होनी चाहिए। विकसित भारत का निर्माण आर्थिक प्रगति के साथ चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी से ही संभव है। संत संसद के माध्यम से युवाओं को भारतीय संस्कृति, वेदों, उपनिषदों और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा दी जाएगी।
संजय गिरि के नेतृत्व में तैयारियां
सातवीं संत संसद का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज़ चैनल के एडिटर इन चीफ और संत संसद के अध्यक्ष संजय गिरि के नेतृत्व में किया जा रहा है। देश के विभिन्न अखाड़ों के संतों, महामंडलेश्वरों और धर्माचार्यों के सहयोग से कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कार्यक्रम का नेटवर्क 10 न्यूज़ चैनल पर प्रसारण किया जाएगा, ताकि देश-विदेश के दर्शक संतों के विचारों और संदेशों से जुड़ सकें।
श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने उम्मीद जताई कि सोमनाथ की धरती पर होने वाली सातवीं संत संसद राष्ट्र-जागरण, सांस्कृतिक स्वाभिमान और सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। उन्होंने भगवान सोमनाथ महादेव से आयोजन की सफलता और राष्ट्र, धर्म तथा मानवता के कल्याण की कामना की।
सातवीं संत संसद: कार्यक्रम की जानकारी
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तारीख: 27, 28 और 29 नवंबर 2026
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स्थान: प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ, गुजरात
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आयोजक: नेटवर्क 10 न्यूज़ चैनल
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अध्यक्ष: संजय गिरि, एडिटर इन चीफ, नेटवर्क 10
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मुख्य विषय: सनातन संस्कृति का संरक्षण, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
संदेश: ना जातिवाद, ना क्षेत्रवाद—केवल राष्ट्रवाद। राष्ट्र की बात, संतों के साथ।