संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने पहले कुछ मिनट के लिए वॉकआउट किया। बाद में सभी दल वापस लौटकर बैठक में शामिल हो गए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष ने सरकार के विरोध में यह कदम उठाया। उनका कहना था कि NCPI को बैठक में बुलाना गलत है, क्योंकि टीएमसी के 20 बागी सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने पर अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि NCPI को अभी मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों की सदस्यता से जुड़े मामले अभी भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें बैठक में बुलाना संसदीय नियमों के खिलाफ है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह विरोध संविधान और संसदीय परंपराओं की रक्षा के लिए किया गया।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों को अलग पहचान देने का कोई कानूनी आधार नहीं है। आम आदमी पार्टी के सांसद एन.डी. गुप्ता ने भी सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।बता दें कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कई अहम मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा होगी।