बिलकिस बानो केस में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में आज (5 मई 2026) सुनवाई हो रही है। इस मामले में 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली थी। यह सुनवाई मुख्य रूप से दोषियों द्वारा सरेंडर के लिए अतिरिक्त समय मांगने या अन्य राहतों से संबंधित हो सकती है।
8 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 11 दोषियों की रिहाई को "अवैध" करार देते हुए रद्द कर दिया और उन्हें 2 सप्ताह के भीतर वापस जेल (सरेंडर) जाने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि गुजरात सरकार दोषियों को रिहा करने के लिए सक्षम नहीं थी, यह अधिकार महाराष्ट्र सरकार के पास था।
सरेंडर का आदेश मिलने के बाद, कई दोषियों ने स्वास्थ्य और अन्य निजी कारणों का हवाला देते हुए सरेंडर के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे अदालत ने पहले खारिज कर दिया था। दोषियों ने 8 जनवरी के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था। यह मामला 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ हुए गैंगरेप और उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या से जुड़ा है, जिसमें 2008 में सीबीआई की विशेष अदालत ने 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।