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राम भारत की आत्मा और राष्ट्रीय चेतना के आधार: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

अयोध्या धाम में आयोजित भव्य दीपोत्सव-2026 समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रभु श्रीराम के आदर्शों को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का आधार बताया। उन्होंने कहा कि राम भारत की आत्मा हैं और हमारी राष्ट्रीय चेतना के आधार हैं। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्ता से बड़ा कर्तव्य, अधिकार से बड़ा दायित्व और वैभव से बड़ा चरित्र होता है। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का वैश्विक उत्सव है।

राज्यपाल ने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब समाज में गरीबों को सम्मान, वंचितों को अवसर, महिलाओं को सुरक्षा, युवाओं को रोजगार और प्रत्येक नागरिक को न्याय मिले। शासन का वास्तविक उद्देश्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुख, सुरक्षा और सम्मान पहुंचाना होना चाहिए।

दीपों की रोशनी से जगमगा रही रामनगरी

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीपोत्सव की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अयोध्या श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक चेतना के प्रकाश से जगमगा रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो आकाश के असंख्य तारे धरती पर उतरकर अयोध्या की पावन धरा को सजा रहे हों।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या करोड़ों लोगों की अटूट आस्था, भारतीय संस्कृति की आत्मा और सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है। यहां की मिट्टी के कण-कण में रामत्व का भाव समाहित है।

राम केवल आराध्य नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के आधार

राज्यपाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण और गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया। श्रीराम केवल आराध्य नहीं हैं, बल्कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के आधार भी हैं।

उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसे समाज से है, जहां न्याय, समानता, संवेदना, लोककल्याण और सुशासन को प्राथमिकता मिले। प्रभु श्रीराम का जीवन हर व्यक्ति को कर्तव्यनिष्ठा, मर्यादा और दूसरों के प्रति सम्मान की प्रेरणा देता है।

पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के नेतृत्व में बदल रही अयोध्या

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या अपनी प्राचीन आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों से जोड़ रही है। यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

उन्होंने कहा कि होटल, धर्मशाला, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, फूल-माला और पूजा सामग्री से जुड़े हजारों परिवारों के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। अयोध्या की रामलीला, लोककला, संगीत, साहित्य और पारंपरिक खान-पान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।

सरयू की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर

राज्यपाल ने सरयू नदी को अयोध्या की जीवनधारा बताते हुए घाटों की स्वच्छता, नदी के निर्मल जल और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि दीपोत्सव का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब दीपों का प्रकाश प्रकृति के संरक्षण और समाज के कल्याण का माध्यम बने। त्योहारों के साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।

सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब उसका फायदा हर वर्ग और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे।

राज्यपाल ने युवाओं से प्रभु श्रीराम के जीवन से अनुशासन, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को रामायण, महाभारत और भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना जरूरी है।

किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का दीप नहीं बुझने देना चाहिए

राज्यपाल ने सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देते हुए कहा कि हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का दीप नहीं बुझने देंगे, किसी बेटी के सपनों को सीमित नहीं होने देंगे और किसी बुजुर्ग को अकेला नहीं छोड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि एक दीप से हजारों दीप जलाए जा सकते हैं, लेकिन उसका प्रकाश कम नहीं होता। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। हमारी खुशियों की रोशनी दूसरों के जीवन में भी आशा और प्रसन्नता का संचार करे, यही दीपावली का वास्तविक संदेश है।

राज्यपाल ने कहा कि दीपोत्सव हमें केवल अपने घरों को रोशन करने की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के जीवन में खुशियों और उम्मीद का उजाला फैलाने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर ही एक बेहतर, संवेदनशील और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है।