राज्यसभा ने आज जल संशोधन अधिनियम, 2024 को मणिपुर में लागू करने के लिए सरकार द्वारा लाए गए एक संकल्प को मंजूरी प्रदान कर दी।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण संसद में यह संकल्प लाया गया है। जल संशोधन अधिनियम में जल प्रदूषण से संबंधित छोटे अपराधों को अपराध की सूची से बाहर करने, कुछ श्रेणियों के औद्योगिक संयंत्रों को वैधानिक प्रतिबंधों से छूट देने सहित विभिन्न प्रावधान किए गए हैं।
इस कानून का मकसद पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को संतुलित करना है। कानून में लगातार उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान है। वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह संकल्प राज्यसभा में पेश किया। संकल्प पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए, विपक्षी सांसदों ने मणिपुर में विधानसभा चुनाव कराने की मांग की। कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने कहा कि संकल्प संसद में इसलिए पेश किया गया क्योंकि मणिपुर की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। तृणमूल कांग्रेस सदस्य सुष्मिता देव ने कहा कि राज्य में लोग अब भी शिविरों में रह रहे हैं।
चर्चा का जवाब देते हुए यादव ने कहा कि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पहले ही पारित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्य की विधानसभाओं ने इसे स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, "संचालन के लिए सहमति (सीटीओ) और अन्य प्रावधान, जिन्हें अन्य राज्य पहले ही अपना चुके हैं, मणिपुर में भी लागू करने की जरूरत है।’’ यह संकल्प जीवन और व्यापार में सुगमता के लिए है और मणिपुर में भी व्यापार करने में आसानी होगी।