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'बटेंगे तो काटेंगे' नारा लोगों को नहीं आएगा पसंद: बीजेपी सांसद अशोक चव्हाण

बीजेपी के राज्यसभा सांसद अशोक चव्हाण ने बुधवार को पीटीआई वीडियो को दिए इंटरव्यू कहा कि चुनावों में 'बटेंगे तो काटेंगे' नारे का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने पार्टी के इस नारे से खुद को किनारे किया। चव्हाण ने कहा, "इस नारे का कोई मतलब नहीं है। नारे चुनाव के समय दिए जाते हैं। ये विशेष नारा अच्छा नहीं है और मुझे नहीं लगता कि लोग इसे पसंद करेंगे। व्यक्तिगत रूप से कहूं तो मैं ऐसे नारों के पक्ष में नहीं हूं। हर राजनैतिक पदाधिकारी को बहुत सोच-विचार कर फैसला लेना होगा। हमें ये भी देखना होगा कि किसी की भावनाएं आहत न हों।"

बीजेपी सांसद ने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतेगी। उन्होंने कहा, "माहौल तो देखिए अच्छा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की सभा मालेगांव में हुई, काफी बड़ी संख्या में लोग वहां उपस्थित थे और उत्साह लोगों में है। पूरे नांदेड जिले में आज उप-मुख्यमंत्री वहां थे, ज्योतिरादित्य सिंधिया जी यहां पर थे। तीन-चार दिन पहले प्रधानमंत्री यहां रहकर गए। एक एलेक्श का फीवर चढ़ गया है। योजनाएं जो केंद्र सरकार ने ऐलान की हैं, सिर्फ ऐलान ही नहीं उन्हें अमल भी किया है। जिस तरह से लोगों का उत्साह दिख रहा है हमें आश्वस्त हैं कि हम जीतेंगे, हमारे उम्मीदवार अच्छे तरीके से चुनकर आएंगे।"

जब उनसे कांग्रेस से बीजेपी में जाने के फैसले के बारे में पूछा गया तो चव्हाणने कहा, "2008-10 के दौरान जो भी राजनैतिक घटनाक्रम हुआ है उसको लेकर लोगों ने जानबूझकर मेरा नुकसान किया और ये तथ्य है। पूरा महाराष्ट्र जानता है और करवाने वाले कांग्रेस के ही साथी थे। खैर छोड़िए, वो लंबा इतिहास है। 14 साल बीत चुके हैं और जो भी मैंने फैसला लिया वो मेरे करियर के हित में है।" चव्हाण ने दावा किया कि सरकार ने कोटा मुद्दे के संबंध में कई फैसले लिए हैं।

उन्होंने कहा, "लोकसभा चुनाव में मराठा आरक्षण का असर ज्यादा था। लोकसभा चुनाव के बाद शिंदे सरकार ने 10 फीसदी आरक्षण जैसे कई फैसले लिए, जिनके पास कुनबी सर्टिफिकेट था, उन्हें आरक्षण दिया गया। लोगों को नौकरियां भी मिलीं।"
'वोट धर्मयुद्ध-वोट जिहाद' मुद्दे के संबंध में पूछे जाने पर चव्हाण ने कहा, ''महायुति और बीजेपी की नीति जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र कहा है। मैं इसे ज्यादा महत्व नहीं देता। व्यक्तिगत रूप से कहूं तो विकास ही मेरा एकमात्र उद्देश्य है। इसलिए पार्टी बदलने के बावजूद लोग मेरे रुख की तारीफ करते हैं।" महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को वोटिंग होगी। नतीजे 23 नवंबर को आएंगे।