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PM मोदी 5 देशों की यात्रा पर रवाना, ऊर्जा, AI, सेमीकंडक्टर और रक्षा साझेदारी पर बड़ा फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच देशों के दौरे की शुरुआत हो गई है। वह शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे से पहले नई दिल्ली से रवाना हो गए हैं। इस यात्रा का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात (UAE) होगा, जहां ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, व्यापार और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UAE में प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होगी। दोनों नेता ऊर्जा आपूर्ति, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर बातचीत करेंगे। माना जा रहा है कि भारत की तेल और गैस जरूरतों को सुरक्षित रखने पर भी चर्चा होगी।

UAE के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड पहुंचेंगे। यहां वह अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे और नीदरलैंड के बड़े बिजनेस लीडर्स से भी मुलाकात करेंगे। 17 मई को प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर पहुंचेंगे। यहां वह स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ 'European Round Table for Industry' कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान AI, मजबूत सप्लाई चेन और ग्रीन ट्रांजिशन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे जाएंगे। 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला नॉर्वे दौरा होगा। यहां भारत-EFTA समझौते और 'Blue Economy' पर फोकस रहेगा। ओस्लो में होने वाले तीसरे India-Nordic Summit में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के नेता भी शामिल होंगे।

दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी Italy पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से होगी। दोनों देशों के बीच 'Joint Strategic Action Plan 2025-2029' की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। इस पूरे दौरे को भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, निवेश और वैश्विक राजनीतिक हालात के बीच यह यात्रा भारत की विदेश नीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।