रिटायर्ड IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद समेत तीन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन लोगों का दावा है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में वे पेलेट गन से घायल हुए थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने या इसे धीरे-धीरे बंद करने की मांग की है। याचिका में मांग की गई है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान पेलेट से घायल हुए सभी लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही पीड़ितों के लिए बेहतर इलाज, लंबे समय तक चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए जाएं।
याचिका में 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत कुमार का भी जिक्र किया गया है। याचिका के अनुसार, वह 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल हुए थे। इसी दौरान कथित तौर पर RAF जवानों की ओर से पेलेट गन चलाए जाने के बाद वह घायल हो गए। वहीं, 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी के बारे में याचिका में कहा गया है कि वह पासपोर्ट और वीजा से जुड़े काम के लिए कनॉट प्लेस गए थे। उनका दावा है कि इसी दौरान RAF जवानों की ओर से चलाई गई पेलेट गन की चपेट में वह भी आ गए।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पेलेट गन से निकलने वाले छर्रों की दिशा तय नहीं होती। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल सुरक्षित या उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की भीड़ पर इस तरह के हथियार का इस्तेमाल 'जरूरत के मुताबिक कम से कम बल' के नियम के खिलाफ है।
बता दें कि देशभर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कई याचिकाएं पहले भी दायर की जा चुकी हैं। 20 जुलाई को CJP की ओर से आयोजित 'संसद चलो' मार्च में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे और कुछ जगहों पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो सुरक्षा बलों ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने का दावा किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि भीड़ के कुछ हिस्सों के हिंसक होने और कथित तौर पर पथराव करने के बाद ही बल का इस्तेमाल किया गया था।