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‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की सैन्य ताकत का बड़ा प्रमाण: एयर मार्शल संजीव कपूर

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) संजीव कपूर ने इसे भारत के लिए “गौरवपूर्ण मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारत की वायु शक्ति, क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता को नई दिशा दी है। एयर मार्शल कपूर ने कहा कि 7 मई 2025 को भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए स्टैंडऑफ स्ट्राइक बेहद सटीक थे और इनमें किसी भी नागरिक ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा।

उन्होंने कहा, “गुंबदों और संरचनाओं में सिर्फ सटीक निशाने के छेद दिखाई दिए, आसपास की किसी नागरिक संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ। भारत ने एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में केवल तय लक्ष्यों को ही निशाना बनाया।” एयर मार्शल कपूर के अनुसार, 10 मई 2025 की सुबह स्थिति में बड़ा बदलाव आया, जब भारत ने स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल करते हुए 45 मिनट के भीतर पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड्स को निशाना बनाया।

उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह गेम-चेंजर साबित हुआ। इसी के बाद पाकिस्तान युद्धविराम की बातचीत के लिए तैयार हुआ। यही भारतीय वायुसेना की ताकत है।” उन्होंने बताया कि यह संघर्ष चीन के सैन्य उपकरणों की वास्तविक परीक्षा भी बन गया। पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए HQ-9 और HQ-16 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 और PL-10 मिसाइलें तथा JF-17 लड़ाकू विमान सभी चीनी मूल के थे।

कपूर ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट इमेजरी भी उपलब्ध कराई थी। उन्होंने कहा, “चीनी, अमेरिकी, यूरोपीय और रूसी विशेषज्ञों ने इस पूरे अभियान का विश्लेषण किया होगा। प्रतिरोधक क्षमता एक निरंतर प्रक्रिया है और विरोधी भविष्य में और उन्नत तकनीकों के साथ लौटेंगे।”

एयर मार्शल कपूर ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सबसे बड़ा सबक रणनीतिक आत्मनिर्भरता का मिला। उन्होंने बताया कि DRDO ने आयातित हथियारों को स्वदेशी और बहु-स्रोत प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने के लिए जरूरी सोर्स कोड हासिल कर लिए हैं, जो भारत को तकनीकी बढ़त देता है। उन्होंने AMCA फिफ्थ जनरेशन फाइटर प्रोग्राम और 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को भारत की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षा का संकेत बताया।

कपूर ने कहा कि पहली बार टाटा, एलएंडटी और भारत फोर्ज जैसी निजी कंपनियों को फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स के प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए शामिल किया गया है, जो HAL के पारंपरिक वर्चस्व से अलग एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रह्मोस, आकाश, पिनाका और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों जैसे भारतीय रक्षा उत्पादों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “अब कई देश भारत से रक्षा उपकरण निर्यात करने की मांग कर रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत को एक बड़े हथियार निर्यातक के रूप में देखा जाने लगा है।”