बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कानून के छात्रों, इंटर्न और नए वकीलों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नए नियम लागू किए हैं। अब सभी को अलग-अलग शपथ पत्र और लिखित घोषणा देनी होगी कि वे सोशल मीडिया पर BCI की गाइडलाइन का पालन करेंगे और अदालतों व कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखेंगे।
नई गाइडलाइन के अनुसार, वकालत के लिए नामांकन कराने वाले हर व्यक्ति को शपथ पत्र देना होगा। वहीं, कानून के छात्रों को लॉ कॉलेज में दाखिले के समय और इंटर्नशिप शुरू करने से पहले भी लिखित घोषणा देनी होगी कि वे तय नियमों का पालन करेंगे।
BCI ने साफ कहा है कि छात्र और इंटर्न:
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कोर्ट, जज के चैंबर या लॉ ऑफिस के अंदर रील या वीडियो नहीं बनाएंगे।
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कोर्ट की कार्यवाही या क्लाइंट मीटिंग की रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे।
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किसी केस की गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेंगे।
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"Day in Court", "Lawyer Life" जैसे वीडियो या पोस्ट नहीं डालेंगे, जिससे कानूनी पेशे की गरिमा कम हो।
वकीलों के लिए भी सख्त नियम
नई गाइडलाइन के तहत वकील:
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कोर्ट परिसर में प्रचार या प्रमोशनल वीडियो नहीं बनाएंगे।
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कोर्ट भवन या वकीलों की ड्रेस (रोब) का इस्तेमाल सोशल मीडिया ब्रांडिंग के लिए नहीं करेंगे।
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भ्रामक कानूनी जानकारी या क्लाइंट की प्रशंसात्मक टिप्पणियां पोस्ट नहीं करेंगे।
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कोर्ट की कार्यवाही के एडिट किए गए वीडियो या क्लिप सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेंगे।
BCI ने जजों, वकीलों या अदालत की कार्यवाही से जुड़े AI-जनरेटेड या डीपफेक वीडियो और तस्वीरें बनाने या साझा करने पर भी रोक लगा दी है, अगर वे भ्रामक या गलत जानकारी फैलाते हों। हालांकि, BCI ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर कानूनी जागरूकता फैलाने पर कोई रोक नहीं है। वकील और कानूनी विशेषज्ञ कानून, अदालत के फैसलों और कानूनी विषयों पर सही और तथ्यात्मक जानकारी साझा कर सकते हैं, लेकिन वह भ्रामक, सनसनीखेज या प्रचारात्मक नहीं होनी चाहिए और उससे किसी कानूनी परिणाम की गारंटी का दावा भी नहीं किया जाना चाहिए।