तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। आंध्र प्रदेश सरकार के मुताबिक, सोमवार सुबह 7 बजे तक इस आपदा में 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 2,500 से 3,000 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। राहत और बचाव कार्य में करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी और 14 सैन्य हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। सुरक्षा बलों ने अब तक 8,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई भारतीय नागरिक भी लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 149 से 180 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि करीब 275 से 320 भारतीय अभी लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें आंध्र प्रदेश के 14 तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जिनमें 7 आंध्र प्रदेश के निवासी और 7 NRI हैं।
इस बीच, 20 तेलुगु तीर्थयात्री सुरक्षित काठमांडू पहुंच गए हैं। ये लोग तिब्बत से नेपाल में आई भीषण बाढ़ से बचकर निकले हैं। आंध्र प्रदेश सरकार के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे 144 तीर्थयात्रियों को तिब्बत के सागा काउंटी से कोदारी चेकपोस्ट के रास्ते सुरक्षित निकाला गया। इन 144 लोगों में 20 तेलुगु तीर्थयात्री भी शामिल हैं। इनमें शास्त्री और उनके परिवार के तीन सदस्य भी हैं। सभी तीर्थयात्रियों के मंगलवार को मुंबई पहुंचने की योजना है, जहां से वे अपने-अपने घर जाएंगे।
बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी और 14 सैन्य हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। घायलों और प्रभावित लोगों को तुरंत इलाज देने के लिए 6 विशेष मेडिकल सर्जिकल टीमें भी काम कर रही हैं। भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम और तकनीकी विशेषज्ञ त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के अभियान में मदद कर रहे हैं।
बताया गया है कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण 25 मील से ज्यादा सड़कें और 40 सस्पेंशन ब्रिज तबाह हो गए हैं। भारी बारिश, भूस्खलन और बंद घाटियों के कारण हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। तिब्बत में बाढ़ के कारण एक अस्थायी झील भी बन गई है, जिससे आगे और खतरा पैदा होने की आशंका है। भारतीय और खासकर आंध्र प्रदेश के तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत और नेपाल के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।