उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए गुरुवार को केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई। गौरीकुंड के पास भूस्खलन के चलते ट्रैकिंग रूट पर भारी मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से पैदल मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। वहीं, मुनकटिया के पास केदारनाथ हाईवे पर भी मलबा और पत्थर गिरने से यातायात प्रभावित हुआ है। गौरीकुंड गेट से करीब 200 मीटर आगे भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरकर ट्रैकिंग रूट पर आ गए, जिससे केदारनाथ धाम जाने वाला पैदल मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर केदारनाथ यात्रा तत्काल रोक दी और रास्ते में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। पुलिस, जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और अन्य संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लेते हुए मलबा हटाने तथा मार्ग को बहाल करने का काम शुरू किया।
हालांकि, लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी से रुक-रुककर गिर रहे पत्थरों के कारण बहाली कार्य में बाधा आ रही है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति को देखते हुए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इधर, रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ हाईवे के कई हिस्सों में भी भारी बारिश के कारण भूस्खलन और भू-कटाव की घटनाएं सामने आई हैं। मुनकटिया के पास सड़क पर मलबा और चट्टानें गिरने से यातायात बाधित हुआ है। प्रशासन की ओर से मार्ग को जल्द से जल्द साफ कर यातायात बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि आधिकारिक अनुमति मिलने तक केदारनाथ की ओर यात्रा न करें और प्रशासन की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देशों और एडवाइजरी का सख्ती से पालन करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रैकिंग रूट से पूरी तरह मलबा हटाने और मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही केदारनाथ यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।
वहीं, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर मौके की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को जल्द से जल्द सड़क संपर्क बहाल करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बताया कि बुधवार देर रात और गुरुवार सुबह केदारनाथ हाईवे समेत कई स्थानों पर भूस्खलन की सूचना मिली थी। केदारनाथ हाईवे चारधाम यात्रा और केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए प्रमुख मार्ग है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और मार्गों को सुरक्षित तरीके से बहाल करने का काम कर रही हैं।