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Kanpur Kidney Transplant Racket: बड़े किडनी रैकेट का पर्दाफाश! पुलिस ने किया भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर के कई निजी अस्पतालों के माध्यम से चल रहे कथित अवैध गुर्दा प्रत्यारोपण रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पांच डॉक्टरों के साथ-साथ सरगना को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हरिदत्त नेमी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग के साथ संयुक्त रूप से कल्याणपुर क्षेत्र के मेड-लाइफ अस्पताल, आहूजा अस्पताल और प्रिया अस्पताल (निजी अस्पताल) में देर रात छापेमारी के बाद ये गिरफ्तारियां की गईं।

पुलिस ने बताया कि जांच से छह से सात और अस्पतालों की संलिप्तता का संकेत मिलता है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। पुलिस ने अस्पताल मालिकों - डॉ. प्रीति आहूजा (50), उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (54), चिकित्सक राजेश कुमार (44), राम प्रकाश (40) और नरेंद्र सिंह को अवैध अंग प्रत्यारोपण में सहायता करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कथित सरगना शिवम अग्रवाल (32) को भी गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर डॉक्टर होने का ढोंग कर रहा था।

प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि बिहार के मूल निवासी एमबीए छात्र आयुष से एक किडनी 10 लाख रुपये में खरीदी गई और मेरठ की मरीज पारुल तोमर को 60 लाख रुपये में बेच दी गई। किडनी देने वाला शख्स मेड-लाइफ अस्पताल में भर्ती था, जबकि किडनी प्राप्तकर्ता, जो कथित तौर पर आठ वर्षों से किडनी की बीमारी से जूझ रही थी, उसे दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था।

यह रैकेट तब सामने आया जब दाता आयुष ने भुगतान विवाद को लेकर पुलिस को सूचित किया और आरोप लगाया कि उसे तय राशि के बजाय केवल 3.5 लाख रुपये ही मिले। सूचना मिलते ही तुरंत छापेमारी की गई और गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि कथित सरगना अग्रवाल ने डॉक्टर बनकर टेलीग्राम समूहों के माध्यम से दाताओं को लुभाया। बताया जाता है कि यह नेटवर्क आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों और डायलिसिस रोगियों को निशाना बनाता था और उन्हें अवैध चैनलों के माध्यम से जोड़ता था।