दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन में पेश की गई CAG रिपोर्ट्स पर चर्चा के दौरान पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर वित्तीय अनियमितताओं, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये रिपोर्ट्स किसी राजनीतिक दल या मौजूदा सरकार ने तैयार नहीं की हैं, बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था CAG ने तैयार की हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद लंबित CAG रिपोर्ट्स को विधानसभा में रखा गया है। उनके करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में अब तक 19 CAG रिपोर्ट्स सदन में पेश की जा चुकी हैं और इन पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। CM रेखा गुप्ता ने कहा कि विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट्स पिछली सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञापन, सब्सिडी, दिल्ली जल बोर्ड और PWD समेत कई विभागों में अनियमितताएं सामने आई हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, टेंडर जारी करने से लेकर सब्सिडी देने तक की प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों के मामले सामने आए।

मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2024-25 का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली का बजट करीब 80,798 करोड़ रुपये था, लेकिन वास्तविक खर्च लगभग 61 हजार करोड़ रुपये ही हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास पैसा उपलब्ध था तो उसका इस्तेमाल सड़क, फ्लाईओवर, स्कूल और दूसरे विकास कार्यों पर क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि करीब 32 योजनाओं के लिए 1,517 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया, लेकिन इन योजनाओं पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। इसके अलावा 34 अन्य योजनाओं के लिए 2,961 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद राशि खर्च नहीं हुई। रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली में आयुष्मान केंद्र खोलने और लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए 150 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन इस राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया और पैसा वापस चला गया। स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस के लिए उपलब्ध 40 करोड़ रुपये की ग्रांट पर भी शून्य खर्च होने का दावा किया गया।

उन्होंने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए उपलब्ध 39 करोड़ रुपये की ग्रांट और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन के लिए उपलब्ध 40 करोड़ रुपये का भी जिक्र किया, जिनका कथित तौर पर उपयोग नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 19,973 करोड़ रुपये की योजनाओं से जुड़े 1,734 Utilization Certificates लंबित थे, जबकि केवल 482 सर्टिफिकेट जमा किए गए। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी खर्च की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
रेखा गुप्ता ने टेंडर प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में 530 करोड़ रुपये की कुल राशि से जुड़े 45 टेंडर एक ही PAN कार्ड के जरिए किए गए। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी राशि के टेंडर एक ही PAN कार्ड से कैसे जारी किए गए और इसकी निगरानी किस स्तर पर हुई।

मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों की Regulatory Asset का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 में यह राशि करीब 9,000 करोड़ रुपये थी, जो बाद में बढ़कर 27,200 करोड़ रुपये और वर्तमान में करीब 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यह बिजली खरीद की लागत और उपभोक्ताओं से प्राप्त राजस्व के बीच बना वित्तीय अंतर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस बोझ को दिल्ली की जनता पर डालने की अनुमति नहीं देगी और इस मामले में अदालत में लड़ाई जारी है।
CM रेखा गुप्ता ने कहा कि मौजूदा सरकार ने करीब डेढ़ साल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं। स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए प्रोक्योरमेंट सेल के 40 अधिकारियों का तबादला और तीन अधिकारियों के निलंबन का जिक्र उन्होंने किया।

उन्होंने बताया कि GST विभाग में वर्षों से एक ही जगह तैनात 150 अधिकारियों का तबादला किया गया और नई पोस्टिंग के लिए लकी ड्रॉ की व्यवस्था अपनाई गई। सरकारी खरीद में Government e-Marketplace यानी GeM को अनिवार्य किया गया है। साथ ही दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सिस्टम को e-Office में बदला जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि सिस्टम में जो ‘दीमक’ लगी थी, उसे हटाने के लिए मौजूदा सरकार ने ‘पेस्टिसाइड’ का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद गड़बड़ियों को सामने लाकर उन्हें दूर करना है।रेखा गुप्ता ने विधानसभा अध्यक्ष से CAG रिपोर्ट्स पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग और जनता के साथ अन्याय के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।