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महंगाई का ट्रिपल अटैक! पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG भी हुई महंगी

देश में आम जनता को महंगाई का एक और झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब CNG के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। ताज़ा संशोधन के तहत CNG की कीमत में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस बढ़ोतरी के बाद CNG की नई कीमत 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इससे पहले गुरुवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में भी लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिससे आम उपभोक्ताओं का बजट पहले ही प्रभावित था। अब CNG के दाम बढ़ने से टैक्सी, ऑटो और कमर्शियल वाहनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है। 

मुंबई में पहले ही CNG की कीमतों में बदलाव देखा जा चुका है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने CNG के दाम में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की थी। नई दरों के लागू होने के बाद मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) में CNG की कीमत बढ़कर लगभग 84 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह 82 रुपये प्रति किलोग्राम थी। कीमतों में इस लगातार बढ़ोतरी के कारण अब ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने भी चिंता जताई है। मुंबई में ऑटो रिक्शा यूनियनों ने पहले ही किराए में कम से कम 1 रुपये की बढ़ोतरी की मांग उठाई थी। उनका कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण मौजूदा किराए में वाहन चलाना आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है। 

अब जब दिल्ली में भी CNG की कीमत बढ़ चुकी है, तो इसका सीधा असर कैब, ऑटो और डिलीवरी सेवाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ऑटो-टैक्सी किराए में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। ईंधन कीमतों में इस तरह की लगातार बढ़ोतरी को लेकर आम लोगों में चिंता बढ़ रही है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए यह नया बदलाव घरेलू बजट को और प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी ईंधन कीमतों पर असर डाल रहा है। इसके चलते आने वाले समय में ईंधन दरों में स्थिरता की उम्मीद कम नजर आ रही है। पेट्रोल, डीजल और अब CNG की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और परिवहन क्षेत्र से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक महंगाई का असर और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।