भारत आज यूनेस्को के 20वें इंटरगवर्नमेंटल कमिटी फॉर द सेफगार्डिंग ऑफ इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज (ICH) सत्र की मेजबानी कर रहा है। यह प्रतिष्ठित आयोजन भारत के लिए सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म दुनिया की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और उसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
इस सत्र में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और नीति-निर्माता शामिल होंगे। बैठक के दौरान अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में नए तत्वों को शामिल करने पर विचार किया जाएगा। साथ ही, पारंपरिक कला, लोक संस्कृति, शिल्प, त्योहार और मौखिक परंपराओं के संरक्षण के लिए वैश्विक रणनीतियों पर भी चर्चा की जाएगी।
भारत, जो स्वयं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला देश है, इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह में है। भारत पहले भी योग, कुंभ मेला, छाऊ नृत्य, रामलीला और कई अन्य परंपराओं को ICH सूची में शामिल करा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सत्र की मेजबानी से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को और मजबूती मिलेगी।
इस सत्र के दौरान यूनेस्को और सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने, युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने तथा डिजिटल माध्यमों से विरासत संरक्षण को प्रोत्साहित करने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। कुल मिलाकर, यूनेस्को का यह 20वां ICH सत्र भारत के लिए न केवल सम्मान की बात है, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक मंच पर अपनी भूमिका को और सशक्त करने का अवसर भी है।