स्कॉटलैंड में रहने वाले हिंदू समुदाय के नागरिक अधिकारों, जन-वकालत और भावी नेतृत्व को नई दिशा देने की पहल के तहत ग्लासगो के ऐतिहासिक पेस्ले टाउन हॉल में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। Banyan Tree Network और Scottish Hindu Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में ब्रिटेन और स्कॉटलैंड के राजनेताओं, वैश्विक हिंदू विचारकों, युवा उद्यमियों और सामुदायिक नेताओं ने हिस्सा लिया।
29 और 30 अगस्त को आयोजित इस सम्मेलन को स्कॉटलैंड में हिंदू समुदाय का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बताया गया। सम्मेलन में हिंदू समाज की सार्वजनिक जीवन में भूमिका, नीति-निर्माण, तकनीक, मीडिया, मंदिर प्रबंधन, युवा नेतृत्व और हिंदू पहचान से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि हिंदू समुदाय को केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित न रहकर संस्थागत स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए मजबूत संगठनों के निर्माण, नेतृत्व विकास, नीति-निर्माण में भागीदारी और युवाओं को आगे लाने की जरूरत पर चर्चा हुई।
Banyan Tree Network को ऐसे वैश्विक नेटवर्क के तौर पर पेश किया गया, जिसमें अलग-अलग संस्थाएं अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखते हुए ज्ञान, संसाधनों और विशेषज्ञता को साझा कर सकें। सम्मेलन के दौरान ‘पेस्ले पैटर्न’ को लेकर एक विशेष ऐतिहासिक प्रस्तुति भी दी गई। इसमें इस प्रसिद्ध पैटर्न के भारत के करीब 2,000 वर्ष पुराने मंडला प्रतीकवाद से संभावित सांस्कृतिक संबंध पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में मौजूद रेनफ्रेवशर की प्रोवोस्ट लोरेन कैमरून ने पेस्ले के इतिहास और भारत के साथ उसके सांस्कृतिक जुड़ाव के महत्व पर बात की। वहीं, वेस्ट स्कॉटलैंड के MSP नील बिब्बी ने अपने संबोधन में स्कॉटिश समाज में हिंदू समुदाय के योगदान की सराहना की और सम्मेलन को पेस्ले में आयोजित करने के लिए आयोजकों का आभार जताया।
सम्मेलन में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंकों, संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। Banyan Tree Network के संस्थापक राजीव मल्होत्रा ने कहा कि उनका लक्ष्य दुनिया भर में हिंदू जन-वकालत के लिए एक ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ स्थापित करना है। उन्होंने योग्यता और काम के आधार पर सक्षम लोगों को नेतृत्व के अवसर देने पर जोर दिया।
वहीं, Scottish Hindu Foundation में नेतृत्व परिवर्तन भी हुआ। डॉ. रिचा सिन्हा ने हरि किरण वडलामणि से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। इसे नेटवर्क के रोटेशनल और डायनामिक लीडरशिप मॉडल का हिस्सा बताया गया, जिसे अलग-अलग देशों की जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाएगा।
सम्मेलन में ब्रिटिश संसद के APPG (All-Party Parliamentary Group of British Hindus) की सदस्य सुसान मरे (MP), पूर्व सदस्य एलिसन थेवलिस (MSP), काउंसलर जेम्स एडम्स, काउंसलर पॉल एडलिन और Interfaith Scotland की सुसान सीगल समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। दो दिवसीय सम्मेलन में हिंदू समुदाय की सामाजिक और सार्वजनिक भागीदारी को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने और विभिन्न संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे की रणनीति पर मंथन किया गया।