हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार, 21 अगस्त से शुरू होगा। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बुधवार को बताया कि 10 बैठकों वाले इस सत्र के लिए अब तक ऑनलाइन 1,026 सवाल मिले हैं। सत्र 21 अगस्त से शुरू होकर 3 सितंबर तक चलेगा। पठानिया ने बताया कि विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी। सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए गुरुवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है।
18 अगस्त तक विधानसभा सचिवालय को 1,026 सवाल मिले हैं। इनमें तारांकित और अतारांकित दोनों तरह के सवाल शामिल हैं। ज्यादातर सवाल स्वास्थ्य और शिक्षण संस्थानों में खाली पदों, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और राज्य से जुड़े अन्य मुद्दों पर हैं। विधानसभा को अलग-अलग नियमों के तहत 50 अन्य मामले भी मिले हैं। इनमें 13 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, नियम 62 के तहत 2 नोटिस, निजी सदस्य दिवस के लिए नियम 101 के तहत 5 नोटिस और नियम 130 के तहत 15 नोटिस शामिल हैं। सभी नोटिस ऑनलाइन मिले हैं और इन्हें सरकार को भेज दिया गया है।
नियम 130 के तहत स्वास्थ्य, दवाओं, राशन और अन्य जनहित के मुद्दे उठाए गए हैं। इन मुद्दों पर चर्चा के लिए कम से कम दो घंटे का समय उपलब्ध रहेगा। पठानिया ने कहा कि विधानसभा की कार्यक्षमता 90 से 120 प्रतिशत के बीच रही है, जिसे उन्होंने देश की सबसे बेहतर विधानसभा कार्यक्षमताओं में से एक बताया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की ओर से सदन में दिए गए आश्वासनों को पूरा कराने के लिए स्पीकर के तहत एक आश्वासन समिति बनाई जा सकती है। इसका उद्देश्य यह देखना होगा कि सदन में दिए गए सरकारी आश्वासनों पर सही तरीके से कार्रवाई हो रही है या नहीं।
उन्होंने कहा कि यदि सदस्य इस समिति के गठन की इच्छा जताते हैं तो वह इसका गठन कर सकते हैं। फिलहाल सरकार की ओर से दी जा रही जानकारी और आश्वासनों की स्थिति संतोषजनक है। हालांकि, अगर किसी आश्वासन के पूरा न होने की बात उनके संज्ञान में आती है तो स्पीकर को समिति गठित करने और मामले का संज्ञान लेने का अधिकार है। पठानिया ने सभी विधायकों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि विशेषाधिकार से जुड़े करीब 5 से 7 मामले अभी लंबित हैं, जबकि ज्यादातर मामलों का निपटारा किया जा चुका है। वहीं, विधानसभा की याचिका समिति को अब तक करीब 120 याचिकाएं मिली हैं, जिनमें से 75 लोगों को इसका लाभ मिला है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा अपने 100 साल से ज्यादा पुराने भवन को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही भवन की विरासत और उसकी उपयोगिता को भी बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।