पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल को लेकर बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने आज एक जुलाई से पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर लगने वाले टैक्स में बदलाव किया है. सरकार ने पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और ATF पर विंडफॉल टैक्स घटा दिया है. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, डीजल के एक्सपोर्ट पर SAED यानी विशेष अतिरिक्त एक्सोर्ट ड्यूटी घटाकर 8.5 रुपये/लीटर कर दिया गया है, जो कि पहले 14 रुपये/लीटर था. वहीं, एटीएफ यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर शुल्क 12.5 रुपये/लीटर से घटाकर 7.5 रुपये/लीटर कर दिया गया है. दूसरी ओर पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स 1.5 रुपये/लीटर से बढ़ाकर 4 रुपये/लीटर कर दिया गया है.
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स में किए गए इस बदलाव का असर सभी तेल कंपनियों पर पडेगा. ये संशोधित दरें आज बुधवार, 1 जुलाई 2026 से लागू हो गई हैं. केंद्र सरकार ने मार्च में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट पर ये विशेष टैक्स लगाया था और तब से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जा रही है. शुरुआत में डीजल और एटीएफ पर शुल्क लगाया गया था, जबकि मई में पेट्रोल पर भी ये लागू किया गया.
वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले निर्यात पर पहले दी गई छूट को अब मॉरीशस और मालदीव तक बढ़ा दिया गया है. विंडफॉल टैक्स में किए गए इस बदलाव का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ेगा. इंडियन ऑयल, एचपी या भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां, जो विदेशों में तेल निर्यात करती हैं, उनपर ये टैक्स लगेगा. ये कंपनियां जो तेल विदेशों में एक्सपोर्ट करेंगी, ये टैक्स उनके लिए हैं. यानी तेल के इंपोर्ट यानी आयात पर ये टैक्स नहीं लगता है.
सरकार, विंडफॉल टैक्स इसलिए बढ़ाती है, ताकि देश से कम तेल एक्सपोर्ट हो और यहां तेल की कमी न हो. पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाने का मतलब है कि सरकार चाहती हैं कि देश में पेट्रोल की उपलब्धता बनी रहे. वहीं डीजल और एटीएफ की स्थिति सामान्य होने या उपलब्धता ज्यादा होने के चलते इसमें थोड़ी ढील दी गई है. सरकार का कहना है कि ये टैक्स घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान निर्यात से अनुचित लाभ कमाने से रोकने के लिए लगाया गया है.