कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भूइयां सरमा से जुड़े पासपोर्ट विवाद में क्राइम ब्रांच ने कांग्रेस नेता को समन भेजा है। मामले में क्राइम ब्रांच ने सुरजेवाला को 23 मई को गुवाहाटी में अपने कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है। इस मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पहले ही जांच में शामिल हो चुके हैं। सरमा ने कांग्रेस नेता खेड़ा पर एआई से तैयार फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप लगाया है।
असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कांग्रेस नेता को 23 मई को गुवाहाटी में जांच अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि यह समन कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा से इस महीने की शुरुआत में क्राइम ब्रांच द्वारा कई घंटों तक की गई पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों के बाद जारी किया गया है। यह घटनाक्रम इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसने असम में सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखा टकराव पैदा कर दिया है। जांच एजेंसियां कथित तौर पर इस विवाद से जुड़े बयान, टिप्पणियों और सोशल मीडिया नैरेटिव की भी जांच के दायरे का विस्तार कर रही हैं।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब कांग्रेस प्रवक्ता खेड़ा ने एक राजनीतिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर कथित रूप से विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद असम में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर खेड़ा को गुवाहाटी में पूछताछ के लिए तलब किया।
खेड़ा इस महीने की शुरुआत में क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए थे, जहां उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद उन्होंने जांच को लेकर विस्तार से कोई टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन यह जरूर कहा कि कांग्रेस असम में भाजपा सरकार के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी। असम पुलिस की यह जांच अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है, खासकर तब जब जांचकर्ताओं ने संकेत दिए कि मामले में कांग्रेस के अन्य नेताओं से भी पूछताछ की जा सकती है।
अब रणदीप सुरजेवाला को औपचारिक रूप से समन जारी किए जाने के बाद, पूछताछ के अगले चरण से पहले असम का राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है। कांग्रेस ने अब तक इस जांच को राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई बताया है, जबकि भाजपा ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि यह मामला सार्वजनिक विमर्श में गरिमा और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।