आजादी का मतलब सिर्फ देश का आजाद होना नहीं है। आज के समय में असली आजादी तब है, जब हर परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो और अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर कम निर्भर रहे। इसी दिशा में केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ एक बड़ी पहल है। कई सालों से आम परिवारों के लिए हर महीने आने वाला बिजली का बिल एक बड़ी चिंता रहा है। बिजली की बढ़ती कीमतों के कारण लोगों की कमाई का एक हिस्सा हर महीने बिल चुकाने में चला जाता है। ऐसे में घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाना परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।
‘पीएम सूर्य घर योजना’ सिर्फ सोलर पैनल लगाने की योजना नहीं है। इसका मकसद लोगों को अपनी बिजली खुद बनाने का मौका देना भी है। यानी परिवार बिजली का सिर्फ इस्तेमाल करने वाला नहीं, बल्कि बिजली बनाने वाला भी बन सकता है। हाल ही में 9 अगस्त के पीआईबी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 300 गीगावॉट से ज्यादा स्वच्छ और गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली है। यह 2030 तक 500 GW स्वच्छ ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से ज्यादा है।
रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में भी तेजी से काम हो रहा है। देशभर में अब तक 43,05,709 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इससे 51,46,031 से ज्यादा परिवारों को फायदा मिला है। इन सोलर सिस्टम से कुल 15,254.41 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ी है। सरकार ने इसके लिए ₹28,752.7 करोड़ की सब्सिडी सीधे लोगों के बैंक खातों में भेजी है।
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा परिवारों के बजट पर दिखाई देता है। सोलर पैनल लगने के बाद कई परिवारों का बिजली बिल काफी कम हो रहा है और करीब 19 लाख परिवारों का मासिक बिजली बिल शून्य हो चुका है। इससे हर महीने बचने वाला पैसा परिवार दूसरे जरूरी कामों में खर्च कर सकता है। कोई बच्चों की पढ़ाई पर पैसा लगा सकता है, तो कोई स्वास्थ्य या भविष्य की बचत के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है।
इस योजना की खास बात यह भी है कि लोग अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली बनाकर उसे ग्रिड में भेज सकते हैं। नेट-मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली देने वाले करीब 12 लाख परिवारों को ₹421 करोड़ की राशि उनके बैंक खातों में दी जा चुकी है। यानी अब घर की छत सिर्फ बिजली का खर्च कम नहीं कर रही, बल्कि अतिरिक्त बिजली से कमाई का जरिया भी बन सकती है।
सरकार ने सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। 10 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट की जरूरत खत्म कर दी गई है। इसके अलावा 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आवेदन और नेट-मीटरिंग शुल्क माफ किया गया है। ‘जन समर्थ’ पोर्टल के जरिए लोगों को बिना जमानत के आसान दरों पर बैंक लोन की सुविधा भी मिल रही है।
इस योजना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। देश में 30,000 से ज्यादा पंजीकृत वेंडर्स इस काम से जुड़े हैं। सोलर पैनल बनाने, बेचने, लगाने और उनकी देखभाल जैसे कामों में रोजगार बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र में 17 लाख से ज्यादा हरित नौकरियां पैदा करना है। सरकारी भवनों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ रहा है। देशभर में 1.06 लाख से ज्यादा सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। इससे सरकार के बिजली खर्च में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, भारत में सोलर पैनल बनाने को बढ़ावा मिलने से ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती मिल रही है।
कुल मिलाकर, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ आम परिवार के लिए बिजली का खर्च कम करने के साथ-साथ उसे ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश है। जब कोई परिवार अपनी छत पर बिजली बनाता है, अपना बिल कम करता है और जरूरत से ज्यादा बिजली बेचकर कमाई करता है, तो यह सिर्फ सौर ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम है।
भारत को 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए जरूरी है कि विकास का फायदा आम परिवार तक पहुंचे। देश की लाखों छतों पर लगे सोलर पैनल इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह पहल बिजली बचाने के साथ-साथ परिवारों के बजट को मजबूत करने और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।