Year Ender 2025: शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद 2025 में निवेशकों की संपत्ति 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ी, जिसे बीएसई सेंसेक्स में लगभग आठ प्रतिशत की तेजी से मदद मिली। विदेशी पूंजी का बाहर जाना, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं, वैश्विक टकराव, ऊंची कीमतें और कमजोर रुपये ने बाजार को अस्थिर कर दिया, जिससे पूरे साल उतार-चढ़ाव बना रहा।
29 दिसंबर तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स पिछले साल 78,139 पर बंद हुआ था, जो इस साल 6,556 अंक बढ़कर 84,675 पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क निफ्टी पिछले साल 23,658 पर बंद हुआ था, जो इस साल 2,282 अंक बढ़कर 25,939 पर बंद हुआ।
इस साल बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 30.20 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 472.15 लाख करोड़ रुपये हो गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण अप्रैल में पहली बार 400 लाख करोड़ रुपये के अहम आंकड़े को पार कर गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बार-बार ब्याज दरों में कटौती से भी बाजारों को मजबूती मिली, जिससे खासकर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों को फायदा हुआ।
2025 में रिकॉर्ड संख्या में प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकशों यानी आईपीओ ने भी बाजारों को समय-समय पर मुनाफा दर्ज करने में मदद की। सबसे बड़े आईपीओ में से, टाटा कैपिटल, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया और लेंसकार्ट सॉल्यूशंस ने निवेशकों का काफी ध्यान खींचा। बीएफएसआई क्षेत्र ने जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि आईटी और धातु शेयरों ने भी बाजार में तेजी लाने में योगदान दिया। हालांकि 2025 में बाजारों के लिए सबसे बड़ी गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये यानि लगभग 18 बिलियन अमेरिकी डॉलर की रिकॉर्ड निकासी थी।
अमेरिकी टैरिफ को लेकर लगातार अनिश्चितता और कमजोर होते रुपये की वजह से बाजारों पर भी दबाव रहा। जैसे-जैसे 2025 खत्म हो रहा है, बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मजबूत घरेलू तरलता, अच्छी कमाई और नीतियों में निरंतरता के कारण 2026 में शेयर बाजार में सकारात्मक रुख रहेगा।