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दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 वर्षीय छात्रा से उत्पीड़न के आरोपी स्कूल केयरटेकर को जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को तीन वर्षीय नर्सरी छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपी स्कूल केयरटेकर को नोटिस जारी किया। यह नोटिस दिल्ली पुलिस द्वारा निचली अदालत से मिली जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर जारी किया गया। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने आरोपी ललित कुमार से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 29 मई को तय की। ललित कुमार के खिलाफ जनकपुरी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज है।

क्या है मामला?

अभियोजन के अनुसार, घटना 1 मई 2026 को सामने आई, जब बच्ची की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी तीन वर्षीय बेटी के साथ स्कूल परिसर में यौन उत्पीड़न हुआ। बच्ची स्कूल केवल दूसरी बार गई थी। घर लौटने के बाद उसने दर्द और असहजता की शिकायत की और बाद में स्कूल के केयरटेकर की पहचान आरोपी के रूप में की। पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन द्वारका की एक अदालत ने 7 मई को उसे नियमित जमानत दे दी।

दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने हाईकोर्ट में जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह पॉक्सो अधिनियम के तहत बेहद गंभीर मामला है, जिसमें न्यूनतम 20 साल की सजा और आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।

उन्होंने अदालत से कहा,
"यह बेहद गंभीर मामला है। जमानत रद्द किया जाना पूरी तरह उचित है।"

राज्य सरकार की याचिका के अनुसार बच्ची ने जांच के दौरान आरोपी की पहचान की। एक पोर्टेबल कैमरे की CCTV फुटेज में आरोपी 8:13 बजे से 8:15 बजे के बीच स्कूल के गलियारे की ओर जाते और करीब 8:37 बजे लौटते दिखा। स्कूल परिसर में लगे 64 CCTV कैमरे बंद पाए गए। DVR जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। फोरेंसिक रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।आरोपी के लंबे समय से स्कूल से जुड़े होने के कारण गवाहों और कर्मचारियों को प्रभावित करने की आशंका जताई गई है।

पीड़िता के परिवार की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश कुमार ने बताया कि परिवार ने भी आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए अलग से याचिका दायर की है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले में स्कूल की एक शिक्षिका को भी गिरफ्तार किया गया है और उसकी जमानत याचिका जल्द निचली अदालत में सुनवाई के लिए आ सकती है। हाईकोर्ट ने आरोपी को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।