पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर गुरुवार को भारत ने इस सैन्य अभियान को याद किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जयपुर स्थित दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में एक वीडियो डॉक्यूमेंट्री जारी की। इस डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बदलती आतंकवाद विरोधी नीति को दिखाया गया, जिसमें प्रभावशाली दृश्य, सैन्य अभियानों की झलक और राजनीतिक संदेशों के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को प्रस्तुत किया गया।
डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान शामिल किए गए, जिनमें भारत की सैन्य तैयारी, स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और अधिक आक्रामक सुरक्षा नीति की झलक दिखाई गई। फिल्म में प्रधानमंत्री मोदी का एक प्रमुख संदेश दिखाया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत “हर आतंकवादी और उसके समर्थकों की पहचान करेगा, उनका पीछा करेगा और उन्हें सजा देगा।” उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब “भारत अपनी शर्तों पर और पूरी ताकत के साथ” देगा।
ऑपरेशन सिंदूर के महत्व को बताते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह “सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि सरकार की समग्र रणनीति का जीवंत उदाहरण है,” जिसमें राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य शक्ति ने मिलकर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की। डॉक्यूमेंट्री में सैन्य तैयारियों और रणनीतिक अभियानों के दृश्य दिखाए गए, साथ ही सशस्त्र बलों के समन्वय, साहस और सटीकता को भी रेखांकित किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान ने साबित किया कि भारत उकसावे का जवाब “मजबूत रणनीति, दृढ़ संकल्प और अपार शक्ति” से देगा।
वीडियो में 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसे जम्मू-कश्मीर में शांति और आर्थिक प्रगति को बाधित करने की कोशिश बताया गया। फिल्म में प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक की भी झलक दिखाई गई, जिसमें वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और सेना प्रमुख शामिल हुए थे। बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
डॉक्यूमेंट्री का समापन सरकार की सुरक्षा नीति को दोहराते हुए किया गया, जिसमें कहा गया कि “आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते”, “आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते” और “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य नियंत्रण रेखा (LoC) और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के भीतर आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना था। इस अभियान में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।