बिहार सरकार ने पूर्ववर्ती बेतिया राज एस्टेट की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने हाल में 'बेतिया राज संपत्ति अधिनियम' पास किया है। इसके तहत राज्य के छह जिलों- पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, पटना, सारण और सीवान में फैली 15,000 एकड़ से ज्यादा जमीन के राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इस अधिनियम के जरिये राज्य सरकार उस संपत्ति का प्रबंधन कर पाएगी, जो कभी बेतिया एस्टेट का हिस्सा थी।
विधेयक की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य सरकार करीब पंद्रह हजार तीन सौ अट्ठावन एकड़ जमीन का अधिग्रहण शुरू करेगी। इसकी कीमत करीब सात हजार नौ सौ साठ करोड़ रुपये है। जिला अधिकारियों के मुताबिक जमीन से गैर-कानूनी कब्जा हटाया जाएगा और इसका इस्तेमाल आम जनता के लिए किया जाएगा।
बेतिया एस्टेट के अंतिम राजा हरेंद्र किशोर सिंह की 1893 में मृत्यु हो गई थी। उनकी पहली पत्नी का 1896 में निधन हो गया। दूसरी पत्नी महारानी जानकी कुंवर संपत्ति का सही तरीके से प्रबंधन नहीं कर पाईं। इस वजह से कोर्ट ऑफ वार्ड्स ने संपत्ति का प्रशासन अपने हाथ ले लिया था।