अयोध्या पुलिस ने 13 महीने पुराने एक रहस्यमयी हत्याकांड का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। यह मामला कैब मालिक अजीत गुप्ता की हत्या से जुड़ा है, जिसे आरोपियों ने लूट के इरादे से अंजाम दिया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या गोरखपुर में की गई थी, जबकि शव को सबूत मिटाने के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर में फेंक दिया गया था। शव की पहचान न हो पाने के कारण स्थानीय पुलिस ने उसे लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था।
एसएसपी अयोध्या डॉ. गौरव ग्रोवर ने प्रेस वार्ता में बताया कि अजीत गुप्ता पेशे से कैब चालक थे। आरोपियों ने पहले उनकी कैब बुक की और फिर लूटपाट के इरादे से उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद बदमाश कैब, सोने की चेन और अंगूठी लूटकर फरार हो गए। अपराध को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को दूसरे राज्य में फेंककर जांच को भटकाने की कोशिश की।
यह मामला उस समय पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर बन गया था, जब शव की पहचान नहीं हो सकी। लेकिन मृतक की पत्नी द्वारा की गई गुमशुदगी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लगातार तकनीकी और मैनुअल जांच जारी रखी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन ट्रैकिंग और संदिग्धों से पूछताछ के जरिए पुलिस ने धीरे-धीरे इस जटिल मामले की परतें खोलीं।
लगातार 13 महीने की मेहनत के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद है। एसएसपी ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह खुलासा अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है कि कानून से कोई भी बच नहीं सकता। इस खुलासे के बाद मृतक के परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और जल्द ही सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।