बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी छात्रों के हित में काम नहीं किया और उसकी सरकारों के दौरान पेपर लीक करने वालों को संरक्षण मिला। अनुराग ठाकुर ने दावा किया कि सबसे ज्यादा पेपर लीक की घटनाएं कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान हुईं। उन्होंने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की दलीलें विधेयक के मुख्य मुद्दे से पूरी तरह भटक गईं।
अनुराग ठाकुर ने कहा, "कल 9 घंटे तक चर्चा हुई। इन 9 घंटों में कांग्रेस इस विधेयक पर 9 शब्द भी नहीं बोल पाई। कांग्रेस पहले भी छात्रों के हित में नहीं थी और आज भी नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के मामलों में जमानत पर होने के आरोप हैं, जिनकी सरकार ने छात्रों को जेल भेजा और जिनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा पेपर लीक हुए, कांग्रेस ऐसे लोगों का सम्मान करती है जो पेपर लीक करवाते हैं।"
इस बीच, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के जवाब के बाद लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और सवाल किया कि क्या उन्हें संसद के बुनियादी नियमों की जानकारी भी है।
इस विधेयक पर मंगलवार दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक करीब 9 घंटे तक लंबी चर्चा हुई। बुधवार को सदन में चर्चा फिर शुरू हुई, जिसके बाद विधेयक को पारित कर दिया गया। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत मौजूदा न्यूनतम तीन साल की सजा को बढ़ाकर कम से कम पांच साल करने का प्रस्ताव है। अधिकतम सजा पांच साल से बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है।
विधेयक में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों में शामिल लोगों पर अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव है। अपराध में शामिल पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं पर अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही, उन्हें सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि चार साल से बढ़ाकर आठ साल करने का प्रस्ताव है। संगठित तरीके से परीक्षा संबंधी अपराध करने वालों के लिए न्यूनतम सजा को पांच साल से बढ़ाकर सात साल करने का प्रस्ताव है। अधिकतम सजा 10 साल तक होगी। ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया जाएगा।