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CM योगी बोले- ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’, ताकत मिलने पर उद्दंड व्यवहार पर अंकुश जरूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार किसी व्यक्ति को ताकत मिलने के बाद वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। ऐसे में व्यवस्था में एक ऐसा अंकुश जरूरी है, जो लोगों को अपनी मर्यादा में रहकर काम करने के लिए बाध्य करे। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकायुक्त जैसी संस्थाएं लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्षों की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में आम नागरिक का विश्वास है। जनता का विश्वास ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। अगर लोगों का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं होगा तो सुशासन के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है।

सीएम योगी ने कहा कि केवल किसी संस्था का गठन कर देने से समस्या का समाधान नहीं होता। जरूरी है कि आम व्यक्ति बिना किसी डर के अपनी शिकायत लेकर आए और उसका नियमानुसार समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि शिकायत का निस्तारण मेरिट के आधार पर होना चाहिए। साथ ही शिकायत व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करने वालों पर भी कार्रवाई जरूरी है। झूठी और बेवजह की शिकायतें सिस्टम का समय खराब करती हैं और वास्तविक पीड़ित को न्याय मिलने में भी देरी होती है।

2017 में PDS से जुड़ी 60% शिकायतें, अब लगभग शून्य

मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासन में आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी शिकायतें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनों के इस्तेमाल और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद राशन वितरण में हेराफेरी की गुंजाइश काफी कम हुई है। आज करीब 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।

मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े करीब 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन सभी मामलों का समाधान किया गया है। हालांकि इस दौरान करीब नौ लाख नए मामले भी सामने आए। उन्होंने कहा कि पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे जमीन की माप में गड़बड़ी की संभावना कम होगी और एक इंच जमीन भी इधर-उधर करना मुश्किल होगा।

सीएम योगी ने जनधन खातों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन की रकम में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज करीब 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाभार्थी और सरकार के बीच अब कोई बिचौलिया या दलाली नहीं है। यही सुशासन है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर इस्तेमाल से प्रशासन में पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका इस्तेमाल लोक कल्याण और सुशासन के लिए हो। मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसमें कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई की गई, इसका विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए।

उन्होंने देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव भी दिया, जिसमें अलग-अलग संस्थाओं की बेहतर कार्यप्रणाली और अनुभवों पर चर्चा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्ण जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों के लिए मजबूत कार्ययोजना और रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा रही है। उन्होंने संस्था को मजबूत करने में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही फैसला किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। लोकायुक्त ने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान को भी याद किया।

उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अपने 50 वर्षों के सफर में कई दौर देखे हैं और हर दौर में यह साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक जीवंत व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त के पास बड़ी संख्या में शिकायतें गांवों से आती हैं। इनमें मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास और शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी जैसी शिकायतें शामिल हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है।

उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के जरिए लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के चार क्षेत्रों में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण दर 90 प्रतिशत दर्ज की गई।

संगठन की सचिव रीमा बंसल ने बताया कि सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों पर कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 लाख 17 हजार 427 रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई। पिछले पांच वर्षों में जांच के बाद 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन से पहले लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और लघु फिल्म भी देखी। कार्यक्रम में लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।