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लंदन में संत संसद ने पांचवें दिन रचा नया इतिहास, दो मंजिला क्रूज पर सजी संत संसद, संतों ने युवाओं को दिया सही मार्गदर्शन

लंदन, यूके। विदेश की धरती पर पहली बार आयोजित हो रही संत संसद ने अपने पांचवें दिन लंदन में नया इतिहास रचा। पांचवें दिन संत संसद का आयोजन टेम्स नदी में दो मंजिला क्रूज पर किया गया। इस दौरान टेम्पल पियर पर भगवान राम के भक्त हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर सुंदरकांड का पाठ किया गया। सुंदरकांड पाठ में 200 से अधिक संतों और भक्तों ने भाग लिया। पाठ के बाद आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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पांचवें दिन संत संसद का आयोजन इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के संस्थापक राज राजेश्वर गुरूजी और नेटवर्क 10 न्यूज चैनल के एमडी एवं एडिटर-इन-चीफ संजय गिरी की ओर से किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष, जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष एवं हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज रहे। संत संसद की अध्यक्षता राज राजेश्वर गुरूजी ने की।

पांचवें दिन संत संसद का विषय ‘युवा भारत का भविष्य और युवाओं का मार्गदर्शन संत करेंगे’ रहा। इस दौरान संतों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, उनकी ऊर्जा और क्षमता के साथ-साथ उन्हें सही दिशा देने में संतों की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम: श्रीमहंत नारायण गिरि

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श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी देश का भविष्य उसकी भावी पीढ़ी पर निर्भर करता है। लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, तकनीक और चिकित्सा समेत हर क्षेत्र की प्रगति में युवाओं की अहम भूमिका है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया गरीबी, बेरोजगारी, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान आने वाली पीढ़ी के पास है, लेकिन इसके लिए युवाओं को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल भौतिक सफलता ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, मानसिक शांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य का ज्ञान भी जरूरी है। संतों और आध्यात्मिक गुरुओं की संगति युवाओं को भटकाव से बचाकर सही दिशा में ले जा सकती है।

युवाओं को उनकी शक्ति का अहसास कराने की जरूरत: राज राजेश्वर गुरूजी

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राज राजेश्वर गुरूजी ने कहा कि युवाओं का सही मार्गदर्शन संत ही कर सकते हैं। उन्होंने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया गया, तो उन्होंने समुद्र पार कर माता सीता का पता लगाया और रावण की लंका में जाकर उसके अहंकार को चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि इसी तरह आज के युवाओं को भी उनकी वास्तविक शक्ति का अहसास कराने की जरूरत है। संत युवाओं की ऊर्जा और क्षमता को सही दिशा देकर समाज और पूरे विश्व में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

युवा ऊर्जा को सही दिशा देना जरूरी

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जगतगुरु चक्रपाणि नंद गिरि महाराज ने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी ऊर्जा है। यही ऊर्जा उन्हें रचनात्मक और बदलाव का वाहक बनाती है। यदि युवा ऊर्जा को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि युवाओं से देश और समाज को बड़ी उम्मीदें हैं। युवाओं में अपार क्षमता है, लेकिन इस क्षमता को सही दिशा देने के लिए संतों को आगे आना होगा।

महामंडलेश्वर डॉ. उमाकांतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि युवावस्था आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है। युवा अपने उत्साह, ऊर्जा और जोश के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें सही मार्गदर्शन मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब भी समाज या दुनिया के सामने कोई बड़ा संकट आया है, संतों ने उसका समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज युवाओं का भटकाव भी एक बड़ी चुनौती है और इसका समाधान आध्यात्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों के माध्यम से किया जा सकता है।

रामायण और गीता से जोड़ने पर बदलेगी युवा पीढ़ी

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प्रसिद्ध कथावाचक एवं आध्यात्मिक गुरु चिन्मयानंद बापू ने कहा कि यदि युवाओं को सही ज्ञान और दिशा मिले तो वे पूरे विश्व में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। युवाओं को सही संस्कार और मार्गदर्शन देने के लिए उन्हें रामायण और गीता से जोड़ना जरूरी है और इस कार्य में संत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महामंडलेश्वर भूपेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि युवा अपार संभावनाओं, जोश और शक्ति से भरे हुए हैं। दृढ़ संकल्प और अनुशासन के साथ वे बड़ी से बड़ी चुनौतियों को अवसरों में बदल सकते हैं। पद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंद महाराज ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र के विकास की नींव होते हैं। इस नींव को मजबूत बनाने के लिए युवाओं को नैतिक मूल्यों और मानवता से युक्त शिक्षा देना जरूरी है।

‘भारत की युवा शक्ति दुनिया में बदलाव ला सकती है’

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महंत ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि समय के साथ समाज में बदलाव जरूरी है और यदि संत युवाओं का मार्गदर्शन करें तो युवा इस बदलाव की अगुवाई कर सकते हैं। महामनीषी निरंजन स्वामी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। भारत की बड़ी युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि संत इस युवा शक्ति को भटकने से बचाकर सही दिशा दें तो भारत के युवा पूरी दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

देवेंद्र ब्रह्मचारी ने कहा कि सामाजिक कल्याण, आर्थिक विकास और राजनीतिक परिवर्तन में युवाओं की अहम भूमिका है। युवाओं को अन्याय के खिलाफ खड़े होकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सही मार्गदर्शन की जरूरत है। शिवपुरी महाराज लंदन ने कहा कि युवा समाज, राष्ट्र और विश्व के विकास में सार्थक योगदान दें, इसके लिए उनमें अनुशासन, जिम्मेदारी और निडरता जैसे गुणों का विकास जरूरी है। कार्यक्रम में मां ब्रह्म देवी, अभिनव योगी, परमहंस योगी महाराज समेत कई संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। लंदन में आयोजित संत संसद के पांचवें दिन संतों ने एक स्वर में युवाओं को सही दिशा देने और उनकी ऊर्जा को राष्ट्र एवं मानवता के कल्याण में लगाने का आह्वान किया।