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‘संत संसद 2026’: जगद्गुरु विजयराम देवाचार्य बोले—'राजसत्ता पर धर्मसत्ता का अंकुश जरूरी'

नेटवर्क10 न्यूज चैनल ने 29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस आयोजन में देशभर से कई संतों ने भाग लिया और सनातन धर्म, उसके महत्व तथा समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस विशेष कार्यक्रम में श्रीमद् जगद्गुरु विजयराम देवाचार्य भैया जी महाराज भी उपस्थित हुए। उन्होंने अपने संबोधन में समाज की संरचना और उसके विभाजन के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। महाराज ने समझाया कि किस प्रकार जनतंत्र, लोकतंत्र में परिवर्तित होता है और आगे चलकर व्यवस्था के विभिन्न स्तरों तक पहुंचता है। उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से यह भी बताया कि समाज कैसे अलग-अलग वर्गों और विचारों में बंट जाता है।

जगद्गुरु विजयराम देवाचार्य जी ने कहा कि जब समाज विभिन्न व्यवहारों और विचारों के आधार पर विभाजित होता है, तो वह जातिवाद जैसी समस्याओं में उलझ जाता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि समाज को बांटने के बजाय एकजुट रहने और संगठित होकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

अपने विचारों में उन्होंने संतों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी युग में भले ही राजसत्ता पर एक शासक बैठा हो, लेकिन उस सत्ता को सही दिशा देने के लिए धर्मदंड के साथ एक संत का मार्गदर्शन आवश्यक होता है। यदि संतों का नियंत्रण और मार्गदर्शन न हो, तो राजसत्ता अपने कर्तव्यों से भटक सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक राजसत्ता पर धर्मसत्ता का संतुलित नियंत्रण नहीं होगा, तब तक शासक मनमानी करते रहेंगे। अंत में उन्होंने समाज को एकता, नैतिकता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए जरूरी है कि समाज संगठित रहे और मूल्यों के प्रति जागरूक बना रहे।