मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य निर्माण कार्यों में तेजी लाना और छोटी परियोजनाओं के लिए बार-बार उच्च स्तर से मंजूरी लेने की प्रक्रिया को कम करना है।
31 साल पुराने वित्तीय अधिकारों में होगा बदलाव
वित्तीय नियम संग्रह खंड-1 के तहत अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इन अधिकारों में समय-समय पर शासनादेश के जरिए बदलाव किए जाते रहे हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था पिछले 31 वर्षों से अधिक समय से लागू है। इस दौरान निर्माण सामग्री, मजदूरी और सेवाओं की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में पुराने वित्तीय अधिकारों की सीमा में काम कराना मुश्किल हो रहा था। छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे परियोजनाओं में देरी होती थी।
लोक निर्माण और सिंचाई समेत कई विभागों को लाभ
नए प्रस्ताव के तहत लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग समेत अन्य अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ाई जाएगी। इससे अभियंताओं को निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर अपने स्तर पर कार्यों को मंजूरी देने और उन्हें आगे बढ़ाने में अधिक सुविधा मिलेगी। बार-बार उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की जरूरत कम होने से निर्माण और विकास परियोजनाओं के काम में तेजी आने की उम्मीद है।
सड़क और ग्रामीण विकास परियोजनाओं में आएगी तेजी
सरकार के मुताबिक, निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत बढ़ने के कारण 1995 में निर्धारित वित्तीय अधिकारों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। कैबिनेट के इस फैसले से निर्माण कार्यों में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कम करने और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने में मदद मिलेगी। वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ने से सड़क, सिंचाई, ग्रामीण विकास और अन्य निर्माण परियोजनाओं में विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।