ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए बुधवार को दिल्ली पहुंचे। अराघची भारत में तीन दिनों तक रहेंगे। अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से यह तेहरान की ओर से पहली उच्च स्तरीय राजनयिक दौरा है। अराघची मुख्य रूप से बृहस्पतिवार से शुरू होने वाली ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए भारत आए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर के साथ पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर केंद्रित व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। इस दौरान भारतीय पक्ष रणनीतिक जलमार्ग से शेष व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर जोर दे सकता है। अराघची और ब्रिक्स सदस्य देशों के अन्य विदेश मंत्री बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर कहा, 'ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नयी दिल्ली पहुंचने पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हार्दिक स्वागत है।' पश्चिम एशिया में बढ़ता संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर इसके प्रभाव ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में प्रमुख चर्चा के विषय रह सकते हैं। ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत, सितंबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले इस बैठक की मेजबानी कर रहा है।
दरअसल, भारत इस पूरे संकट में संतुलित कूटनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर भारत के इजरायल और अमेरिका से मजबूत संबंध हैं। वहीं ईरान भारत की ऊर्जा और कनेक्टिविटी रणनीति का अहम साझेदार है। ऐसे में ईरानी विदेश मंत्री अराघची का दौरा भारत को मध्यस्थ और संवाद समर्थक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर देता है।