उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग परिसर पहुंचकर नवनिर्मित ‘आदित्य पतंजलि योगपीठम्’ का उद्घाटन किया और स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया। आयोग के अनुसार, यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने परिसर का आधिकारिक दौरा किया है। इस अवसर पर न्यायमूर्ति ने भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह न्यायालय में प्रभाव या सत्ता के बजाय साक्ष्य और तर्क के आधार पर निर्णय होता है, उसी तरह भर्ती में किसी की पहचान या सिफारिश नहीं, बल्कि उसकी पात्रता और योग्यता महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में व्यक्तिगत पहचान के बजाय केवल मेरिट को मान्यता मिलनी चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया में दिखनी चाहिए निष्पक्षता

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 तक लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता और उनके कामकाज के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। आयोग केवल परीक्षाएं आयोजित नहीं करते, बल्कि देश के बेहतर भविष्य के लिए योग्य लोकसेवकों का चयन भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का चयन केवल किसी व्यक्ति को नौकरी देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाले वर्षों के प्रशासन और सुशासन पर भी पड़ता है। इसलिए चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि निष्पक्ष होना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि निष्पक्षता लोगों को दिखाई भी दे। न्यायमूर्ति ने आयोग परिसर की हरियाली, पारदर्शी चयन व्यवस्था और ‘कल्पवृक्ष संग्रहालय’ की कलात्मकता की सराहना की।
न्यायपालिका और चयन संस्थाओं का आधार लोक विश्वास

कार्यक्रम में UPPSC के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के बीच समान मूल्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों के कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी वैधानिक आत्मा एक है और दोनों का आधार जनता का विश्वास है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय नागरिकों को न्याय का कानूनी आश्वासन देते हैं, जबकि चयन संस्थाएं उन्हें समान अवसर का संवैधानिक विश्वास प्रदान करती हैं। उन्होंने आयोग की पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के महत्व पर भी जोर दिया।
योग, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का संगम

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग परिसर में बने ‘आदित्य पतंजलि योगपीठम्’ का उद्घाटन किया। यहां सूर्य नमस्कार की विभिन्न मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही, भारत के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के योगदान को भी दर्शाया गया है, ताकि युवाओं को देश की बौद्धिक उपलब्धियों से प्रेरणा मिल सके।
उन्होंने परिसर के ‘बोधि संगम’ का भी निरीक्षण किया। इसे अभ्यर्थियों के लिए आत्मचिंतन और प्रेरणा का स्थल बनाया गया है। इसके अलावा उन्होंने ‘कल्पवृक्ष संग्रहालय’ और ‘हल्दीघाटी शौर्य स्थल’ का अवलोकन किया। हल्दीघाटी शौर्य स्थल पर दांडी मार्च की प्रतिकृति, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ स्थापित हैं।
12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने ‘वृंदावन ऑफिसर्स आवास’ के 12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण किया। इसके साथ ही आयोग के आधिकारिक कैलेंडर का विमोचन भी किया गया। आयोग में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में अनुसचिव ओंकारनाथ सिंह, वरिष्ठ अनुसेवक प्रेम चंद्र मौर्य, निजी सचिव श्रीनाथ और विभिन्न अनुभागों में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
कार्यक्रम में आयोग के सदस्य मेजर जनरल (डॉ.) मनोज कुमार ने आयोग की आधुनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। अंत में आयोग के सदस्य डॉ. ए.के. वर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अशोक भूषण, हाईकोर्ट के न्यायमूर्तिगण राहुल चतुर्वेदी, अजीत सिंह और राजीव लोचन मेहरोत्रा सहित अन्य न्यायमूर्ति, वरिष्ठ अधिवक्ता, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और आयोग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।