लोकसभा की विशेषाधिकार समिति की पहली बैठक बुधवार को भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित की गई। यह समिति की परिचयात्मक बैठक थी। बैठक में रविशंकर प्रसाद के साथ तारिक अनवर (कांग्रेस), मणिकम टैगोर (कांग्रेस), रामवीर सिंह बिधूड़ी (भाजपा), त्रिवेंद्र सिंह रावत (भाजपा), अरविंद गणपत सावंत (शिवसेना-यूबीटी), जगदीश शेट्टर (भाजपा), मनीष तिवारी (कांग्रेस) और धर्मेंद्र यादव (समाजवादी पार्टी) सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “संसद की विशेषाधिकार समिति की बैठक में शामिल हुआ, जहां कुछ महत्वपूर्ण पहल पर चर्चा की गई और निर्णय लिए गए।” इससे पहले 3 मार्च को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समिति के सदस्यों को नामित किया था। यह समिति संसद के विशेषाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करती है और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करती है।
समिति में बृजमोहन अग्रवाल (भाजपा), तारिक अनवर (कांग्रेस), मणिकम टैगोर (कांग्रेस), टीआर बालू (डीएमके), कल्याण बनर्जी (एआईटीसी), श्रीरंग आप्पा चंदू बार्ने (शिवसेना), रामवीर सिंह बिधूड़ी (भाजपा), संगीता कुमारी सिंह देव (भाजपा), जगदंबिका पाल (भाजपा), त्रिवेंद्र सिंह रावत (भाजपा), अरविंद गणपत सावंत (शिवसेना-यूबीटी), जगदीश शेट्टर (भाजपा), मनीष तिवारी (कांग्रेस) और धर्मेंद्र यादव (समाजवादी पार्टी) शामिल हैं।
विशेषाधिकार समिति सांसदों के अधिकारों की रक्षा करने, अवमानना से जुड़े मामलों की जांच करने और संसदीय कार्यवाही की गरिमा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इसका गठन एक नियमित लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है, जो विधायी निगरानी को मजबूत करती है। यह समिति अध्यक्ष द्वारा भेजे गए मामलों की जांच करेगी और विशेषाधिकार के उल्लंघन से जुड़े मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, ताकि संसद की मर्यादा बनी रहे।
यदि किसी विशेषाधिकार से जुड़े मामले को सदन द्वारा समिति को भेजा जाता है, तो समिति की रिपोर्ट अध्यक्ष या किसी सदस्य द्वारा सदन में पेश की जाती है। वहीं, यदि मामला अध्यक्ष द्वारा नियम 227 के तहत भेजा जाता है, तो रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंपी जाती है, जो इस पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं या उसे सदन के पटल पर रखने का निर्देश दे सकते हैं।