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FWICE ने 'Ghooskhor Pandat' टाइटल पर बॉयकॉट की चेतावनी दी

Ghooskhor Pandat: नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘Ghooskhor Pandat’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मनोज बाजपेयी अभिनीत और नीरज पांडे द्वारा निर्मित इस फिल्म के शीर्षक पर फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने कड़ा विरोध जताया है।

FWICE के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने फिल्म के शीर्षक में इस्तेमाल किए गए शब्द “पंडत” पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह शब्द समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक फिल्म के शीर्षक में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक संगठन फिल्म के निर्माताओं के साथ किसी भी तरह का सहयोग नहीं करेगा।

बीएन तिवारी ने एक इंटरव्यू में कहा, “मुझे इस फिल्म के शीर्षक में ‘पंडत’ शब्द के इस्तेमाल पर गंभीर आपत्ति है। चाहे यह किसी का उपनाम ही क्यों न हो, फिल्में जनता के मनोरंजन के लिए बनती हैं, किसी समुदाय का अपमान करने के लिए नहीं। जो लोग लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं, उन्हें फिल्म बनाने का कोई अधिकार नहीं है।”

FWICE, जो 36 से अधिक फिल्म और मीडिया से जुड़ी यूनियनों का प्रतिनिधित्व करता है, ने प्रमुख प्रोड्यूसर संस्थाओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, जिनमें नेटफ्लिक्स भी शामिल है, को पत्र लिखकर इस फिल्म को मौजूदा शीर्षक के साथ रजिस्टर या रिलीज न करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि अब सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। कई राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं, जहां कुछ लोगों ने मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे के पुतले जलाए और फिल्म का नाम बदलने की मांग की। लखनऊ में फिल्म की टीम के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है, जिसमें जातीय और धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया है।

विवाद बढ़ने के बाद निर्देशक नीरज पांडे ने सफाई देते हुए कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘पंडत’ शब्द किसी समुदाय या जाति पर टिप्पणी नहीं, बल्कि एक किरदार का बोलचाल में दिया गया नाम है। हालात को शांत करने के लिए फिल्म से जुड़ा प्रमोशनल कंटेंट भी फिलहाल हटा लिया गया है।

वहीं, अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह उन सभी लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं जिन्हें इस शीर्षक से ठेस पहुंची है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म किसी भी समुदाय को निशाना बनाने के इरादे से नहीं बनाई गई है, बल्कि यह एक खामियों वाले किरदार की कहानी है, न कि किसी सामुदायिक एजेंडे की।