Rajesh Khanna: भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार राजेश खन्ना की 29 दिसंबर को 83वीं जयंती है। वे बॉलीवुड के पहले सच्चे सुपरस्टार थे, जिन्होंने स्टारडम का मतलब हमेशा के लिए बदल दिया।
राजेश खन्ना का करियर दो दशक से भी लंबा था, उन्होंने 160 से ज्यादा फिल्में की। प्रशंसक में उनके लिए भारी दीवानगी थी। अपने सहज आकर्षण, भावुक आंखों और दमदार आवाज से उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा राज किया जैसा उनसे पहले किसी ने नहीं किया था। उन्होंने सुपरस्टारडम का ऐसा आदर्श स्थापित किया जिसका अनुसरण आने वाली पीढ़ियों ने किया।
उनका असली नाम जतिन खन्ना था, उनका जन्म 1942 में अमृतसर में साधारण पृष्ठभूमि के परिवार में हुआ था। वहां से उठकर उन्होंने 1965 में अखिल भारतीय प्रतिभा प्रतियोगिता जीती। इसके साथ ही उनके लिए फिल्मों के द्वार खुल गए। उन्होंने अपनी पहली फिल्म 1966 की “आखिरी खत” से अभिनय की शुरुआत की। ये फिल्म अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी। फिर उन्होंने 1969 में “आराधना” से पूरे देश का दिल जीत लिया। ये फिल्म उनके असाधारण करियर की शुरुआत थी।
1969 से 1971 के बीच राजेश खन्ना ने लगातार 15 हिट फिल्में दीं। ये रिकॉर्ड आज भी कायम है। “आराधना”, “दो रास्ते”, “सफर”, “कटी पतंग”, “आनंद”, “अमर प्रेम”, “हाथी मेरे साथी”, “बावर्ची”, “नमक हराम” और “आप की कसम” जैसी क्लासिक फिल्मों में गहन रोमांस और सामाजिक नाटक से लेकर सौम्य, मध्यमवर्गीय यथार्थवाद तक, उनकी बहुमुखी प्रतिभा दिखी।
1970 के दशक ने उन्हें पीढ़ी की दिल की धड़कन के रूप में स्थापित कर दिया। उन पर फिल्माए गए गाने सदाबहार बन गए। उनके संवाद सांस्कृतिक मुहावरों में समा गए। उनके प्रशंसकों में से कई महिलाएं थीं। उन्होंने भारतीय सिनेमा में पहले कभी न देखी गई भक्ति दिखाई।
हालांकि 1970 के दशक के अंत में और 1980 के दशक में दर्शकों की पसंद में बदलाव आया। राजेश खन्ना ने 1983 में “अवतार”, 1983 में ही “अगर तुम ना होते” और 1986 में “अमृत” जैसी फिल्मों में दमदार चरित्र भूमिकाओं के साथ खुद को नए रूप में ढाला।
अपने शानदार करियर में राजेश खन्ना ने 1970 की “सच्चा झूठा”, 1971 की “आनंद” और 1974 की “अविष्कार”के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का तीन फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। 2013 में, उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। ये भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। ये सम्मान फिल्म उद्योग में उनके अमूल्य योगदान के लिए दिया गया।
राजेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर, मुमताज, हेमा मालिनी, जया बच्चन, जीनत अमान और राखी समेत अपने समय की प्रमुख अभिनेत्रियों के साथ यादगार जोड़ी बनाई और हिंदी सिनेमा के कुछ कालजयी प्रेम प्रसंग थे। राजेश खन्ना का निजी जीवन भी उन्हें सुर्खियों में रखता था। उनका विवाह अभिनेत्री डिंपल कपाडिया से हुआ था। उनकी बेटियां ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना ने फिल्म उद्योग में करियर बनाए। ट्विंकल सफल लेखिका और निर्माता के रूप में भी उभरीं।
रिकॉर्ड्स और पुरस्कारों से परे, राजेश खन्ना की विरासत दर्शकों के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव में निहित है। वे सिर्फ स्टार ही नहीं, बल्कि विलक्षण प्रतिभा के मालिक थे। वे पहले अभिनेता थे, जिन्होंने दिखाया कि सिनेमाई नायक संवेदनशील, काव्यात्मक और गहरे मानवीय भी हो सकते हैं। निधन के सालों बाद भी राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा की स्मृति में अंकित हैं। सिनेमा जगत उनकी 83वीं जयंती पर उन्हें याद कर रहा है। मूल सुपरस्टार का जादू आज भी जिंदा है – उनकी फिल्मों में, उनके गीतों में और उन लाखों लोगों के दिलों में जो आज भी उन्हें ‘काका’ कहते हैं।