सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से कहा कि वह इस साल दिवाली पर पटाखों के नियमों में कुछ छूट देने की संभावना पर विचार करे। खासतौर पर पटाखों से होने वाले शोर की तय सीमा में राहत देने पर विचार करने को कहा गया है। जस्टिस एमएम सुंदरश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ दिल्ली और उत्तर भारत के दूसरे राज्यों में पटाखों से जुड़े नियमों के मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला कई सालों से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CPCB के वकील से कहा, "कृपया कुछ छूट देने पर विचार करें। हम नहीं चाहते कि दिवाली से ठीक पहले इस मामले में जल्दबाजी हो।" इससे पहले 22 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से CPCB से जानकारी लेने को कहा था कि क्या कुछ पटाखों को शोर से जुड़े नियमों में छूट देकर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।
बुधवार को केंद्र सरकार और CPCB की ओर से पेश ऐश्वर्या भाटी ने मामले की सुनवाई कुछ समय के लिए टालने की मांग की। कोर्ट ने उनकी मांग मान ली और मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की। हालांकि, कोर्ट ने CPCB से कहा कि वह दिवाली से पहले पटाखों के लिए तय शोर की सीमा में कुछ छूट देने की संभावना पर जरूर विचार करे।
पटाखा बेचने वालों की ओर से वरिष्ठ वकील जे. साई दीपक ने कहा कि पटाखों को लेकर अभी भी नियम साफ नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनके एक मुवक्किल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि कम से कम लाइसेंस वापस किया जाए, ताकि अगर अदालत पटाखे बनाने की अनुमति देती है तो उनके पास लाइसेंस मौजूद हो।
यह मामला 2015 में शुरू हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पटाखों की बिक्री, बनाने और इस्तेमाल को लेकर कई नियम बनाए थे। पहले कोर्ट ने दिल्ली में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई थी। हालांकि, 2025 में दिवाली के आसपास कुछ समय के लिए दिल्ली-एनसीआर में मंजूर किए गए ग्रीन पटाखों को बेचने और चलाने की अनुमति दी गई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।