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RSS शताब्दी समारोह पर पीएम मोदी ने डाक टिकट और सिक्का किया जारी, बोले- चुनौतियों के बावजूद...

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी अंतर्विरोध नहीं होता क्योंकि ये सभी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करते हैं। आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र की सेवा और समाज को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास करते रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आज जारी किया गया स्मारक डाक टिकट एक श्रद्धांजलि है, जो 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में गर्व से मार्च करने वाले आरएसएस स्वयंसेवकों की याद दिलाता है। अपनी स्थापना के बाद से आरएसएस ने राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है। आरएसएस समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी कोई अंतर्विरोध नहीं होता क्योंकि ये सभी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करते हैं।’’

मोदी ने कहा कि आरएसएस ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार में विश्वास करता है, हालांकि आजादी के बाद इसे राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने से रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा, ‘‘विविधता में एकता हमेशा से भारत की आत्मा रही है, अगर यह सिद्धांत टूटा तो भारत कमजोर हो जाएगा। चुनौतियों के बावजूद आरएसएस मजबूती से खड़ा है और निरंतर राष्ट्र की अथक सेवा कर रहा है।’’

केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में की थी जिसका उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना था। मोदी स्वयं एक आरएसएस प्रचारक थे और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पहले एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। भाजपा की वैचारिक प्रेरणा हिंदुत्ववादी संगठन से मिलती है।