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केजरीवाल-सिसोदिया का नया दांव, आज दोपहर 12 बजे पहुंचेंगे राजघाट, 'सत्याग्रह' की तैयारी

दिल्ली की सियासत में जारी घमासान के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है. मंगलवार को मनीष सिसोदिया द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर न्यायिक प्रक्रिया से खुद को अलग करने के ऐलान के बाद, अब केजरीवाल मंगलवार दोपहर 12 बजे राजघाट पहुंचेंगे. उनके साथ मनीष सिसोदिया भी होंगे.

माना जा रहा है कि बापू की समाधि पर नमन कर केजरीवाल अपनी नई रणनीति 'सत्याग्रह' का शंखनाद करेंगे. यह घटनाक्रम सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे गए उस पत्र के बाद आया है, जिसमें केजरीवाल ने मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. 

आम आदमी पार्टी से मिली जानकारी के मुताबिक केजरीवाल दोपहर 12 बजे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ राजघाट पहुंचेंगे. आम आदमी पार्टी का मानना है कि जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. राजघाट जाने के फैसले को पार्टी एक मौन सत्याग्रह और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रही है. पार्टी कार्यकर्ताओं को भी अलर्ट पर रखा गया है. केजरीवाल वहां बापू को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और संभवतः एक संदेश भी जारी कर सकते हैं.

सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को एक पत्र लिखकर हलचल मचा दी थी. इस पत्र में उन्होंने व्यवस्था के प्रति अपना अविश्वास प्रकट किया था. केजरीवाल ने संकेत दिया था कि जिस तरह से विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, उसमें निष्पक्ष सुनवाई की गुंजाइश कम होती जा रही है. सिसोदिया की चिट्ठी और अब केजरीवाल का राजघाट जाना, यह दर्शाता है कि AAP नेतृत्व ने अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर उतरकर 'परसेप्शन' की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है.

अरविंद केजरीवाल की तरह मंगलवार को मनीष सिसोदिया ने पत्र लिखकर कहा है कि सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और अब कोई वकील पेश नहीं होगा. केजरीवाल इसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं. वहीं, केजरीवाल के राजघाट जाने के कार्यक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का कहना है कि जब कानून का शिकंजा कसता है, तो आम आदमी पार्टी को बापू याद आने लगते हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट को चिट्ठी लिखना और वकीलों को हटाने की बात करना महज सहानुभूति बटोरने का नाटक है. भाजपा का आरोप है कि AAP नेता जांच का सामना करने के बजाय न्यायिक संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.