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भारत का बड़ा ऊर्जा प्लान: श्रीलंका तक बिजली सप्लाई की तैयारी, ‘वन सन-वन ग्रिड’ विजन को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली: भारत अब क्षेत्रीय बिजली ग्रिड को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar ने गुरुवार को कहा कि भारत श्रीलंका के साथ पावर ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

Bharat Electricity Summit 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि “वन सन, वन ग्रिड, वन वर्ल्ड” पहल के तहत सीमा पार स्वच्छ ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय कनेक्शन बेहद अहम हैं। खट्टर ने बताया कि भारत पहले से ही Nepal, Bangladesh और Bhutan को बिजली सप्लाई कर रहा है, और आने वाले समय में Sri Lanka को भी बिजली निर्यात करने की योजना है।

उन्होंने भारत की बिजली उत्पादन लागत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बताते हुए कहा कि यूरोप जैसे देशों में प्रति यूनिट लागत लगभग 35 रुपये है, जबकि भारत में यह काफी कम है। सरकार का लक्ष्य इसे और घटाना है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और नए उद्योगों की वजह से बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी। 2024 में देश की पीक बिजली मांग करीब 250 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है और इसे 270 गीगावॉट तक पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही रिन्यूएबल एनर्जी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन फिलहाल कोयला जैसी पारंपरिक ऊर्जा पर भी निर्भर रहना जरूरी होगा ताकि बिजली आपूर्ति लगातार बनी रहे। ग्रिड को स्थिर रखने के लिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत का लक्ष्य 2035 तक लगभग 100 गीगावॉट स्टोरेज क्षमता विकसित करने का है, जिसमें बैटरी और पंप्ड हाइड्रो दोनों शामिल होंगे। खट्टर ने स्टार्टअप्स और उद्यमियों से अपील की कि वे ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन और स्टोरेज के क्षेत्र में नए इनोवेशन लेकर आएं, ताकि सेक्टर को और अधिक कुशल और टिकाऊ बनाया जा सके।

वही, सरकार का मानना है कि मजबूत और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था ही भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।